पशु-पक्षियों पर असर

नई दिल्‍ली न्‍यूज4 इंडिया। दिल्‍ली में बढ़ते प्रदूषण का असर परिंदों की संख्‍या पर पड़ रहा है। राजधानी में इनकी संख्‍या तेजी से कम हो रही है। बर्ड एक्‍सपर्ट्स के अनुसार बीते एक साल में माइग्रेटरी बर्ड्स समेत दिल्‍ली में जो पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती थीं और जितने पॉइंट्स पर बर्ड सेंचुरी में ये दिखती थी, उसमें कमी आ गई है। असोला भाटी वाइल्‍ड सेंचुरी के पक्षी विशेषज्ञ सुहेल मदान ने बताया कि पिछले दो हफ्तों में दिल्‍ली में जिस तरह से प्रदूषण का स्‍तर आठ से दस गुना ज्‍यादा हो गया, उससे शहर में पाई जाने वाली विभिन्‍न प्रजातियों के पक्षियों में 60 फीसदी तक कमी आई है। पहले असोला भाटी वाइल्‍ड लाइफ सेंचुरी में ही 100 पॉइंट्स पर 250 पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती थीं, लेकिन अब पिछले 10 दिनों में इन पॉइंट्स की संख्‍या घटकर 40-50 ही रह गई है। लगातार इस तरह का सर्वे कर रहे हैं कि परिंदे बर्ड सेंचुरी में किधर-किधर पाए जाते हैं, पिछले एक साल में दिल्‍ली में प्रदूषण की भयावह स्थिति के कारण गोरैया, हंस, चील, किंगफिशर पक्षी समेत कई प्रजातियां कम हो गई हैं।

वाइल्‍ड लाइफ इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंडिया के वैज्ञानिक डॉ. वीपी उनयाल ने बताया कि प्रदूषण के कारण साल में दिल्‍ली और आसपास के इलाकों में एक लाख से ज्‍यादा पक्षियों की मौत हो जाती है। पिछले दो हफ्तों से जिस तरीके से बेहद खतरनाक स्‍तर पर दिल्‍ली में प्रदूषण की स्थिति बनी हुई है, इससे अनुमान के मुताबिक करीब 10 हजार से ज्‍यादा पक्षियों की मौत हो गई है।

पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय के प्रोजेक्‍ट सफर के प्रोग्राम डायरेक्‍टर डॉ. गुफरान बेग इस बारे में बताते हैं कि प्रदूषण का सबसे ज्‍याद नुकसान पशुओं और परिंदों को है, क्‍योंकि वह ज्‍यादातर बाहर खुले में ही रहते हैं। इससे उनकी आंखों पर भी असर पड़ता है। सांस लेते समय उनके फेफड़ों की कोशिकाओं में प्रदूषण सीधे जाता है। मौसम विभाग के एन्‍वायरमेंट मॉनिटरिंग एंड रिसर्च सेंटर (ईएमआरसी) के हेड डॉ. विजय कुमार सोनी ने बताया कि बाघ, हिरण, गोरिल्‍ला, सांभर, पक्षियों की प्रजातियों के साथ सभी तरह के पशुओं के लिए ये प्रदूषण बेहद घातक हो रहा है। वहीं इंडियन एसोसिएशन फॉर एयर पॉल्‍यूशन कंट्रोल के जनरल सेक्रेटरी एसके गुप्‍ता ने बतायाकि वायु प्रदूषण के साथ ही जल प्रदूषण की भी भयावह स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण नदियों और तालाबों में मछलियों की संख्‍या भी लगाता‍र गिर रही है। इं‍डस्ट्रियल पॉल्‍यूशन से नदियों व तालाबों में जल प्रदूषण का स्‍तर बढ़ रहा है। मछलियों की संख्‍या कितनी गिरी है। इस ओर भी ध्‍यान देने की जरूरत है।

जेएनयू के पूर्व डीन और स्‍कूल ऑफ एन्‍वायरमेंटल साइंस के प्रोफेसर ऑफ इकोलॉजी सीके वार्ष्‍णेय ने कहा कि दिल्‍ली जैसे शहर में चारों तरफ सड़क पर मौजूद मोटी धूल की परत पत्तियों पर भी जम रही है। इससे सूरज की किरणें पत्तियों के भीतर नहीं पहुंच पा रही हैं। पेड़ कार्बन डाइऑक्‍साइड कम खींच रहे हैं जिसके कारण फूल, फल और पत्तियों की ग्रोथ कम हो रही है। विभिन्‍न अध्‍ययन यह बताते हैं कि ऐसे में पेड़-पौधों की क्रियाएं 10 से 40 फीसदी तक और कुछ-कुछ मामलों में 60 फीसदी तक कम हो जाती है। सड़क के बीचो-बीच लगे पेड़ों की पत्तियां सामान्‍य पेड़ों की तुलनामें सिकुड़ जाती हैं। और पत्तियों का आकार छोटा हो रहा है। ये पत्तियों का गुच्‍छा बन जाता है। इसका कारण इन पर धूल का जमना है। अध्‍ययन में यह भी सामने आया है कि प्रदूषण वाली आबोहवा की तुलना में सामान्‍य स्‍वच्‍छ माहौल में गेहूं की पैदावार अधिक होती है।

3 गुना ज्‍यादा बीमार

पीपुल्‍स फॉर एनीमल्‍स की ट्रस्‍टी गौरी मुलेखी ने बताया कि दिल्‍ली में फैले प्रदूषण का असर पक्षियों और जानवरों पर पड़ रहा है। पक्षी तेजी से बीमार पड़ रहे हैं। संजय गांधी एनीमल केयर सेंटर, जैन बर्ड हॉस्पिटल जैसे शेल्‍टर होम्‍स में बीमार पक्षियों की संख्‍या में जून-जुलाई की तुलना में तीन गुना की बढ़ोत्‍तरी हुई है। इसी प्रकार पालतू पशु जैसे डॉग्‍स तेजी से बीमार पड़ रहे हैं। उन्‍हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है। पालतू पशु जैसे डॉग्‍स तेजी से बीमार पड़ रहे हैं। उन्‍हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है। पालतू जानवर घर के अंदर भी तकलीफ में है।

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