[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: महिलाओं को प्रसाद नहीं देते, वजह कोई जानता नहीं | News 4 India

महिलाओं को प्रसाद नहीं देते, वजह कोई जानता नहीं

जमशेदपुर न्‍यूज 4 इंडिया। जमशेदपुर से 40 किमी दूरी पर पटमदा का प्राचीन हाथीखेड़ा बाबा मंदिर है। 200 साल पुराने इस मंदिर में महिलाएं पूजा कर सकती हैं, प्रसाद चढ़ा सकती हैं, लेकिन इन्‍हें प्रसाद खाने को नहीं दिया जाता। इन्‍हें तिलक लगाने और रक्षा सूत बांधने की भी अनुमति नहीं है। यह कोई जानता नहीं कि ऐसा क्‍यों है। दर्शन के लिए मंदिर पहुंची महिलाओं ने बताया कि उनको प्रसाद ग्रहण न करने की परंपरा बहुत पुरानी है। इस मान्‍यता के पीछे वजह क्‍या है, इसे न तो यहां के पुजारी बता पाते हैं और न मंदिर समिति के लोग। उनका कहना है कि वर्षों से परंपरा चली आ रही है। तो उसका पालन कर रहे हैं। अंधविश्‍वास यह है कि महिलाओं के प्रसाद खानेसे परिवार में अपशगुन हो सकता है, जबकि मंदिर में दर्शन के लिए आनेवाले भक्‍तों में पुरूषों की तुलना में महिलाओं की संख्‍या अधिक होती है। उन्‍हें हाथीखेड़ा बाबा पर आस्‍था है और परंपराओं का निर्वाह करते हुए वे सिर्फ पूजा करती हैं। मंदिर के मुख्‍य पुजारी गिरिजा प्रसाद सिंह सरदार इस परंपरा को आगे भी जारी रखने की बात कही। आदिवासी समाज के कुल देवता की पूजा हाथीखेड़ा मंदिर में होती है। यहां सालभर झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल, ओडि़सा और छत्‍तीसगढ़ से भक्‍त आते रहते हैं। मंदिर परिसर में भक्‍त पेड़ों में नारियल बांधने के साथ बाबा को घंटी चढ़ाते हैं मंदिर के पुजारी के अनुसार करीब 200 साल पहले इस इलाके में हाथियों का आतंक था। हाथियों का झुंड फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही लोगों को मार देता था। इससे बचने के लिए लोगों ने कुल देवता से प्रार्थना की। इसके बाद हाथियों का आना बंद हो गया। खुशी से ग्रामीणों ने पटमदा में मंदिर बनवाया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *