[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: स्‍कूल चले अभियान की खुली पोल 6 साल में 42.86 लाख बच्‍चों ने छोड़ा स्‍कूल – News 4 India

स्‍कूल चले अभियान की खुली पोल 6 साल में 42.86 लाख बच्‍चों ने छोड़ा स्‍कूल

भोपाल न्‍यूज 4 इंडिया। मप्र में 6 साल में 42.86 लाख बच्‍चों ने स्‍कूल जाना छोड़ा है। इसमें सरकारी स्‍कूलों में एडमिशन लेने के बाद पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले बच्‍चों की संख्‍या 28 लाख से अधिक है, जबकि प्राइवेट स्‍कूलों में ऐसे बच्‍चों की संख्‍या 14.86 लाख है। यह खुलासा निशुल्‍क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीआई) पर भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में हुआ है। वित्‍त मंत्री जयंत मलैया ने 31 मार्च 2016 को समाप्‍त हुए वित्‍तीय वर्ष पर सीएजी की रिपोर्ट को विधानसभा में पेश किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने वर्ष 2010 से 2016 तक प्रारंभिक शिक्षा पर 48 हजार करोड़ रूपए खर्च किए हैं बावजूद इसके प्रारंभिक कक्षाओं में एडमिशन लेने के बाद स्‍कूल छोड़ने वाले बच्‍चों की संख्‍या लगातार बढ़ती जा रही है। सरकारी स्‍कूलों की तुलना में प्राइवेट स्‍कूलों में पढ़ने में बच्‍चों की रूचि ज्‍यादा है। पिछले 6 साल में राज्‍य के स्‍कूलों में 1.42 लाख बच्‍चों का दाखिला हुआ। इसमें से प्राइवेट स्‍कूलों में 46.87 लाख बच्‍चों के एडमिशन हुए, जबकि सरकारी स्‍कूलों में यह आंकड़ा26.44 लाख है। यानी सरकारी स्‍कूलों में कक्षा एक से आठवीं तक में एडमिशन में लागातार गिरावट आई है।

चौथे नंबर पर मप्र

बच्‍चों के स्‍कूल छोड़ने के मामले में देश में मप्र का नंबर चौथा है। इसमें सबसे ऊपर उत्‍तरप्रदेश है। इसके बाद राजस्‍थान और महाराष्‍ट्र का नंबर आता है। इतना ही नहीं, भारतीय औसत से भी मप्र में स्‍कूल छोड़ने वालों का प्रतिशत ज्‍यादा है।

स्‍कूल चलो अभियान का रिकॉर्ड नहीं

राज्‍य सरकार ने स्‍कूल चलो अभियान चलाया था। जिसके तहत स्‍कूल शिक्षा विभाग ने घर-घर जाकर 14 साल तक के बच्‍चों की पहचान करने के लिए सर्वे किया था। लेकिन इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है, ज‍बकि बच्‍चों को स्‍कूल में दाखिला दिलाने के लिए एक यूनिक नंबर करना था, जो नहीं किया गया।

48 हजार शिक्षकों के पद खाली

प्रायमरी स्‍कूलों में शिक्षकों के 48 हजार से अधिक पद खाली हैं। इन स्‍कूलों में 1.19 लाख शिक्षक होने चाहिए। जबकि यहां 70,875 शिक्षक हैं आरटीआई के मान के अनुसार मिडिल स्‍कूलों में न्‍यूनतम तीन शिक्षकों की आवश्‍यकता के विरूद्ध वर्ष 2015-16 के दौरान 7,937 मिडिल स्‍कूलों में केवल दो शिक्षक पदस्‍थ हैं।

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