[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: हाईकोर्ट के फैसले के 7 साल बाद सुनवाई | News 4 India

हाईकोर्ट के फैसले के 7 साल बाद सुनवाई

नई दिल्‍ली न्‍यूज 4 इंडिया। अयोध्‍या फिर चर्चा का विषय बन गया है। इसकी तीन वजह हैं। पहली- करीब 164 साल पुराने विवाद पर 5 दिसंबर से कोर्ट सुनवाई शुरू करेगा। दूसरी- 6 दिसंबर को विवादित ढांचा ढहाए जाने के 25 साल पूरे हो रहे हैं। और तीसरी- उत्‍तर प्रदेश में 15 साल बाद उस भाजपा की सरकार है, जिसने अयोध्‍या आंदोलन को तेज किया था। अयोध्‍या पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के 7 साल बाद यह सुनवाई होगी। मामले में 7 साल से लंबित 20 याचिकाएं इस साल 11 अगस्‍त को पहली बार लिस्‍ट हुई थीं। पहले ही दिन दस्‍तावेजों के अनुवाद पर मामला फंस गया था। संस्‍कृत, पाली, फारसी, उर्दू और अरबी सहित 7 भाषाओं में 9 हजार पन्‍नों का अंग्रेजी में अनुवाद करने के लिए कोर्ट ने 12 हफ्ते का समय दिया था। इसके अलावा 90 हजार पेज में गवाहियां दर्ज हैं। यूपी सरकार ने ही 15 हजार पन्‍नों के दस्‍तावेज जमा कराए हैं।

कोर्ट ने तीन हिस्‍सों में बांटी जमीन

30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन 3 बराबर हिस्‍सों में बांट दी थी। अदालत ने रामलला की मूर्ति वाली जगह रामलला विराजमान को दी। सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को और बाकी हिस्‍सा मस्जिद निर्माण के लिए सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड को दिया गया।

7 साल में 20 अर्जियां,  चीफ जस्टिस बदले

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड 14 दिसंबर 2010 को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। फिर एक क ेबाद एक 20 याचिकाएं दाखिल हो गईं। सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को हाईकोर्ट के फैसले पर स्‍टे लगा दिया। पर सनुवाई शुरू नहीं हुई। इस दौरान 7 चीफ जस्टिस बदले। सातवें चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने इस साल 11 अगस्‍त को पहली बार याचिकाएं लिस्‍ट कीं।

5 दिसंबर को होगा ये

5 दिसंबर को दोपहर 2 बजे कोर्ट नं.1 में 3 जजों की स्‍पेशल बेंच सुनवाई शुरू करेगी। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के कॅरियर का यह सबसे बड़ा केस है। अगले साल 2 अक्‍टूबर को वह रिटायर होंगे। सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्‍बल और राजीव धवन होंगे। रामलला का पक्ष हरीश साल्‍वे रखेंगे।

कोर्ट देखेगा कि दस्‍तावेजों को अनुवाद पूरा हुआ है या नहीं। अनुवाद नहीं होने पर पेंच फंस सकता है। पर अदालत कह चुकी है कि अब सुनवाई नहीं टलेगी। 5 दिसंबर से दलीलें सुनी जाएंगी। सबसे पहले ओरिजनल टाइटल सूट दाखिल करने वाले दलीलें रखेंगे, फिर बाकी अर्जियों पर बात करेंगे।

दो धर्मों के 3 जजों की स्‍पेशल बेंच

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा:- 3 तलाक खत्‍म करने और सिनेमा हॉल में राष्‍ट्रगान के दौरान खड़े होने जैसे फैसले सुना चुके हैं।

जस्टिस अब्‍दुल नाजिर:- तीन तलाक बेंच में थे। प्रथा में दखल गलत बताया था। प्राइवेसी को मौलिक अधिकार करार दिया था।

जस्टिस अशोक भूषण:- दिल्‍ली सरकार और एलजी के बीच जारी अधिकारों के जंग के विवाद पर सुनवाई कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *