[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: बाहर क्‍या हो रहा | News 4 India

बाहर क्‍या हो रहा

नई दिल्‍ली न्‍यूज 4 इंडिया। अयोध्‍या मामले की सुनवाई के दौरान अदालती कार्रवाई जुलाई, 2019 तक टालने की मांग के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई अगले वर्ष फरवरी तक टाल दी। कोर्ट इस मामले में मालिकाना हक पर इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय के 2010 के फैसले को चुनौती देने वाली 13 याचिकाओं पर 8 फरवरी 2018 से सुनवाई करेगा। विवादित स्‍थल का दो-तिहाई स्‍वामित्‍व हिंदुओं और एक-तिहाई मुस्लिमों को देने का आदेश दिया था। 5 नवंबर को 90 मिनट की सुनवाई के बाद मुख्‍य न्‍यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्‍यक्षता में जस्टिस अशोक भूषण और अब्‍दुल नजीर की विशेष बेंच ने वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता कपिल सिब्‍बल की सुनवाई जुलाई, 2019 तक टालने की मांग को चौकाने वाला और अचरज भरा बताया।

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने सिब्‍बल की बात काटते हुए कहा,हमेंइस बात से कोई मतलब नहीं कि देश में इसे लेकर क्‍या कहा और बताया जा रहा है। हमारे लिए यह भू-स्‍वामित्‍व विवाद है। हम वैधानिक प्रक्रिया का पालन करेंगे। जस्टिस भूषण ने अगस्‍त की सुनवाई का हवाला देते हुए सिब्‍बल से पूछा, तब आप जनवरी में सुनवाई पर अड़े थे और हमने स्‍पष्‍ट बता दिया था कि आज इससे जुड़े तथ्‍य सामने रखे जाएं। अब आप ये चाहते हैं कि इसकी सुनवाई जुलाई 2019 में हो। ऐसा लगता है कि आप इस मामले को लेकर बिल्‍कुल गंभीर नहीं हैं।

अदालत ने 8 फरवरी की तरीक्ष निश्चित करते हुए स्‍पष्‍ट कर दिया कि उसके बाद सुनवाई किसी भी हालत में नहीं टलेगी और हर दिन सुनवाई होगी।

वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता कपिल सिब्‍बल ने कहा कि अयोध्‍या को लेकर यह याचिकाएं कोई आम संपत्ति विवाद नहीं हैं, क्‍योंकि ये देश की धर्मनिरपेक्ष ढांचे की नींव से जुड़ा मामला है।

वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता हरीश साल्‍वे ने कहा इस केस को भी बाकी याचिकाओं की तरह लेना चाहिए। जुलाई 2019 के बाद सुनवाई रखने का देश में गलत संदेश जाएगा।

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