[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: सुन्‍नी बोर्ड ने कहा-सिब्‍बल हमारे वकील | News 4 India

सुन्‍नी बोर्ड ने कहा-सिब्‍बल हमारे वकील

नई दिल्‍ली न्‍यूज4 इंडिया। सुप्रीम कोर्ट में अयोध्‍या ममाले की सुनवाई 2019 के चुनाव तक टालने की कपिल सिब्‍बल की मांग पर दिनभर सियासत और बयानबाजी चलती रही। शुरूआत बाबरी मस्जिदके पक्षकारों में एक हाजी महबूब के बयान से हुई। सिब्‍बल का बयान गलत बताते हुए उन्‍होंने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि उन्‍होंने सुनवाई टालने की मांग क्‍यों की। विवाद पर जल्‍द फैसला हो।’ इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिब्‍बल के बहाने कांग्रेस और राहुल गांधी पर हमला बोल दिया दिया। मोदी ने महबूब के बयान के हवाले से सिब्‍बल का पर्दाफाश करने के लिए सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड को धन्‍यवाद दे दिया। फिर सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड के वकील और बाबरी मस्जिद एक्‍शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी तथा बोर्ड के वकील मुश्‍ताक अहमद सिद्दीकी ने सिब्‍बल के रूख का समर्थन किया। इसके बाद हाजी बयान से पलट गए। सिब्‍बल ने मोदी पर पलटवार करते हुए कहा कि वह तो सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड के वकील हैं ही नहीं। विवाद के बीच उत्‍तर प्रदेश सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड के अध्‍यक्ष जफर अहमद फारूकी ने सिब्‍बल को अपना वकील और हाजी को बोर्ड सदस्‍य मानने से ही इंकार कर दिया।

सिब्‍बल का पर्दाफाश करने सुन्‍नी बोर्ड का आभार

मोदी ने कहा, कांग्रेस ने हमेशा राजनीतिक लाभ के लिए महत्‍वपूर्ण विषयों को लटका कर देश की दुर्दशा की है। कांग्रेस और सिब्‍बल को हवन में हड्डी डालने जैसी बाधाएं बंद करनी चाहिए। सिब्‍बल का पर्दाफाश करने के लिए मैं सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड का आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

मैं सुन्‍नी बोर्ड नहीं, इकबाल अंसारी का वकील हूं

कपिल सिब्‍बल ने कहा मैं सुप्रीम कोर्ट में सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड का वकील नहीं हूं। न ही मैंने वक्‍फ बोर्ड के वकील की हैसियत से सुनवाई 2019 लोकसभा चुनाव के बाद करने की मांग की थी। इसके बावजूद मोदी सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड को धन्‍यवाद दे रहे हैं। मैंने दिवंगत मोहम्‍मद हाशिम अंसारी के पुत्र इकबाल अंसारी की ओर से पैरवी की।

रिकॉर्ड में सुन्‍नी बोर्ड के वकील के तौर पर सिब्‍बल का भी नाम

रिट पिटिशन नंबर 4192 व 8096 के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (एओआर) शाहिद हुसेन रिजवी थे। ये सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड की याचिका है। इन्‍हीं याचिकाओं पर सिब्‍बल पेश हुए। सुप्रीम कोर्ट के दस्‍तावेज में भी इसका उल्‍लेख है। कोर्ट में याचिका एओआर की ओर से दायर होती है। बहस के लिए आर्गुइंग काउंसिल एओआर की सहमति से अलग से वकील हायर करता है। यह जुबानी होता है। 5 दिसंबर को जब चीफ जस्टिस ने सुन्‍नी बोर्ड को पक्ष रखने को कहा तो सिब्‍बल ने बोर्ड के दस्‍तावेज ट्रांसलेट नहीं होने की पहली दलील रखी।

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