[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: किराने दुकान में काम कर बना दिया बेटे को वैज्ञानिक – News 4 India

किराने दुकान में काम कर बना दिया बेटे को वैज्ञानिक

 

नागपुर न्‍यूज 4 इंडिया। भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर में वैज्ञानिक मयूर पाटिल को महत्‍वपूर्ण अनुसंधानके लिए दूसरी बार गोल्‍ड मेडल मिला है। सेंपरेशन ऑफ अक्टिनाइड फ्रॉम स्‍पेंट फ्यूल एंड आउट स्‍टैंडिंग केमिकल साइंस इस सबजेक्‍ट के अनुसंधान के लिए भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर की टीम कार्यरत थी। जिसमें मयूर भी शामिल थे।

केंद्र सरकार ने इस टीम के संभी मेंबर्स के साथ मयूर को भी स्‍वर्णपदक से सम्‍मानित किया है। मयूर के पिता जलगांव के अमलनेर में किराने की दुकान में जॉब करते हैं। भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर के डायरेक्‍टर कमलेश नीलकंठ व्‍यास और जैव प्रौद्योगिकी डिपार्टमेंट के केंद्रीय सचिव कृष्‍णस्‍वामी विजय राघवन के हाथों हाल ही में मयूर के पिता भगवान पाटिल मूल रूप से धुले जिले के शिरपुरा के रहने वाले हैं। कुछ साल पहले वे अमलनेर की मिल में मजदूरी करते थे। एक दिन अचानक मिल बंद हो गई और भगवान पाटिल की नौकरी चली गई। ऐसे में पाटिल दंपत्‍ती की माली हालत खराब हो गई।

इसके बाद उन्‍हें अमलनेर की किराने की दुकान में क्‍लर्क की नौकरी मिली। तीन बच्‍चों की परवरिश और उनकी शिक्षा के लिए काफी मशक्‍कत करनी पड़ी। बेटे मयूर का वैज्ञानिक बनने का सपना था इसे पूरा करने के लिए पाटिल दंपत्‍ती ने जी तोड़ मेहनत की।

मयूर ने अमलनेर के सानेगुरूजी हाईस्‍कूल में दसवीं तक की पढ़ाई की इसके बाद उसने प्रताम कॉलेज में बीएससी तक की पढ़ाई पूरी की। इसी वक्‍त प्रिंसिपल और नैनो साइंटिस्‍ट डॉ.एल.ए पाटिल ने मार्गदर्शन किया और उत्‍तर महाराष्‍ट्र यूनिवर्सिटी से एमएससी की पढ़ाई करने की सलाह दी। एसएससी पूरी करने के बाद मयूर ने भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर का एग्‍जाम टॉप किया।

वह अब वहां साइंटिस्‍ट बन गए है। मयूर के साइंटिस्‍ट बनने से उसका परिवार आज अपने खुद के घर में रहने लगा है। वहीं बेटे को स्‍वर्णपदक मिलने से पिता उस पर काफी खुश हैं।

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