[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: पुणे से मुंबई तक भड़का दलित आक्रोश युद्ध पर मुद्दा | News 4 India

पुणे से मुंबई तक भड़का दलित आक्रोश युद्ध पर मुद्दा

मुंबई न्‍यूज 4 इंडिया। महाराष्‍ट्र में 200 साल पहले पुणे में हुए भीमा-कोरेगांव युद्ध की बरसी मनाने पर संग्राम छिंड़ गया है। दलित और मराठा समुदाय के बीच छिड़े इस जातिगत संघर्ष की शुरूआत भीमा, पाबल और शिकरापुर गांव से हुई। 1 जनवरी को इस विवाद में पुणे से करीब 30 किमी दूर अहमदनगर हाहवे पर पेरने फाटा के पास झड़प में एक शख्‍स की मौत हो गई। इसके विरोध में 2 जनवरी को महाराष्‍ट्र के 13 शहरों में प्रदर्शनहुए। पुणे, मुंबई, औरंगाबाद में हिंसा भी हुई। प्रदर्शनकारियों ने वाहनों और दुकानों को अपना निशाना बनाया और जमकर तोड़फोड़ की। बसों में भी तोड़फोड़ की गई। हिंसा और तनाव में सबसे ज्‍यादा प्रभावित मुंबई का चेंबूर और मुलुंड इलाका रहा, जहां दलित समुदाय ने रास्‍ता रोको आंदोलन का आह्वान किया था महाराष्‍ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने न्‍य‍ायिक जांच कराने और मृतक के परिजन को 10 लाख रूपए मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।

अंबेडकर के पोते ने की बंद की अपील

डॉ. भीमराव अबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर ने पुणे में न्‍यायिक जाचं को खारिज करते हुए 3 जनवरी को महाराष्‍ट्र बंद की अपील की है। उन्‍होंने मौजूदा जज को जांच सौंपने की मांग की। कहा उस जज को सबूत जुटाने और सजा देने की शक्ति मिले।

इतिहास से ऐसे सुलगी चिंगारी

1 जनवरी 1818 में कोरेगांव-भीमा की लड़ाई में पेशवा बाजीराव द्वितीय पर अंग्रेजों ने जीत दर्ज की थी। इसमें कुछ संख्‍या में दलित भी शामिल थे। अंग्रेजों ने कोरेगांव भीमा में अपनी जीत की याद में जयस्‍तंभ का‍ निर्माण कराया था। बाद में यह दलितों का प्रतीक बन गया। हर साल हजारों की संख्‍या में दलित जयस्‍तंभ पर श्रद्धांजलि देते हैं। 1 जनवरी को 200 वीं बरसी पर 3 लाख लोग यहां इकट्ठा हुए। मराठा समुदाय इसका विरोध कर रहा था।

आरपीआई लीडर, रामदास अठावले का कहना है कि घटना की जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई हो। 200 साल में ऐसी घटना नहीं हुई है।

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