[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: नेता खौफ खाते थे उन्‍हें वृद्धाश्रम में रहना अच्‍छा लगता है | News 4 India

नेता खौफ खाते थे उन्‍हें वृद्धाश्रम में रहना अच्‍छा लगता है

चेन्‍नई न्‍यूज 4 इंडिया। भारत में चुनावों में सुधार और ज्‍यादा पारदर्शिता लाकर चुनावी सिस्‍टम बदलने वाले पूर्व चुनाव आयुक्‍त टीएन शेषन आजकल वृद्धाश्रम में हैं। कई सालों से उनके बारे में कोई खबर नहीं मिल रही थी। अब पता चला कि वे चेन्‍नई स्थित एक ओल्‍ड एज होम में हैं। वह कुछ दिन वहां रहते हैं, कुछ दिन अपने घर। ये टीएन शेषन ही थे, जिन्‍होंने निष्‍पक्ष चुनाव के लिए चुनाव पहचान पत्र को अनिवार्य किया था। शेषन के करीबियों ने बताया कि वे सत्‍य साईं बाबा के भक्‍त रहे हैं। 2011 में सांई बाबा के देह त्‍यागने के बाद वे टूट गए और सदमें में चले गये। उन्‍हें भूलने की बीमारी हो गई थी। ऐसे में रिश्‍तेदारों ने उन्‍हें चेन्‍नई के ओल्‍ड एज होम में भर्ती कराया। तीन साल बाद उनकी स्थिति सुधरी हालांकि वे अब किसी से बात नहीं करते।

दिग्‍गजों पर पड़े भारी

शेषन के चलते हिमाचल प्रदेश के तत्‍कालीन राज्‍यपाल गुलशेर अहमद को इस्‍तीफा देना पड़ा था। आयोग ने मप्र की सतना लोकसभा सीट का चुनाव इसीलिए रद्द कर दिया, क्‍योंकि राज्‍यपाल रहते हुए अहमद ने बेटे सईद अहमद के पक्ष में प्रचार किया था। इस विवाद के बाद हिमाचल के गुलशेर अहमद को इस्‍तीफा देना पड़ा था। उत्‍तरप्रदेश में पूर्व केंद्रयी मंत्री कल्‍पनाथ राय को चुनाव प्रचार बंद होने के बाद भतीजे के लिए वोट मांगते पकड़ा गया। जिला मजिस्‍ट्रेट ने उनका भाषण बीच में रोकते हुए चेतावनी दी कि अगर उन्‍होंने भाषण जारी रखा तो चुनाव रद्द कर दिया जाएगा।

बताई थी शक्ति

मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त रहते हुए शेषन ने चुनाव सुधार को लेकर काफी काम किया। उनके आने के बाद लोगों को पता चला, आयोग इतना शक्तिशाली है। 1992 के उप्र विधानसभा चुनाव में उन्‍होंने जिला मजिस्‍ट्रेटों, पुलिस अधिकारियों और चुनाव पर्यवेक्षकों को साफ कहा, चुनाव तक वह सिर्फ आयोग के प्रति जवाबदेह होंगे। शेषन के कार्यकाल में ही बिहार में चुनाव के दौरान हिंसा पर नियंत्रण लगा और चरणों में चुनाव की शुरूआत हुई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *