[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: आखिरकार उन्हें बुलाना ही पड़ा – News 4 India

आखिरकार उन्हें बुलाना ही पड़ा

वर्ष 2001 में जब जी एस एल वी की लगातार 7 उड़ाने विफल हुई तो उसका विश्लेषण करने के लिए कई बार बैठक हुई मशीन कंट्रोल में एक मिली मीटर की गलती भी पूरा अभियान चौपट कर देती थी 2007 में रिकवरी फ्लाइट में भी गड़बड़ी हुई और जीएसएलवी का कंट्रोल सिस्टम साथ नहीं दे रहा था अप्रैल 2010 में भारतीय क्रायोजेनिक इंजन में टर्बो जेट पंप में गड़बड़ी के कारण सफलता नहीं मिली तब इसरो के प्रमुख वैज्ञानिक को विचार आया कि क्यों ना विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में डिप्टी डायरेक्टर के रूप में काम कर रहे के सिवन को इसमें शामिल किया जाए वह एयरोनाटिक्स के जानकार हैं और म्यूजिक लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी का काम देख रहे हैं मिशन डिजाइन सिमुलेशन दोनों में उनकी महारत हासिल है ् लिहाजा उनसे बात की गई उन्होंने सहर्ष स्वीकार करते हुए इस पर काम शुरु किया तमाम ग़लतियों का आकलन करने के बाद जीएसएलवी के सारे परीक्षण किए और जीएसएलवी डी असफल रहा में 1982 में आने के बाद पीएसएलवी प्रोजेक्ट पर किया इसरो के तमाम विकल का मेरू दंड माने जाने वाली ट्रेन सिमुलेशन सॉफ्टवेयर को इन्होंने ही बनाया है विश्व की श्रेष्ठ सिमुलेशन को इन्होंने तैयार किया आज दुनिया भर के यान इसरो में बनने आते हैं कई अवार्ड जीतने वाले साइंटिस्ट के रूप में जाने जाते हैं इनकी विशेषज्ञता के कारण एक मिशन में इसरो 104 उपग्रह भेज सका जो अपने आप में विश्व रिकॉर्ड है।

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