[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: विकेट से छोटी थी लंबाई, अब बन गये रन मशीन | News 4 India

विकेट से छोटी थी लंबाई, अब बन गये रन मशीन

मुंबई न्‍यूज 4 इंडिया। मुंबई का आजाद मैदान1 यहां एक साथ अक्‍सर 18-20 मैच खेले जाते हैं। सभी खिलाडि़यों का ध्‍यान अपने-अपने मैंचों पर होता है, लेकिन जब यहां पृथ्‍वी शॉ बैटिंग करते हैं तो दूसरी टीमों के खिलाडि़यों के साथ उनके माता-पिता और कोच का भी ध्‍यान पृथ्‍वी की ही बैटिंग में लगा रहता है। लोग उन्‍हें चियर करने दूर-दूर से आते हैं वे मुंबई के सबसे लोकप्रिय युवा क्रिकेटर्स में से हैं। पृथ्‍वी शॉ न्‍यूजीलैंड में चल रहे अंडर-19 विश्‍वकप में भारतीय क्रिकेट टीम की कमान संभाल रहे हैं और 14 जनवरी को भारत का टूर्नामेंट में पहला मैच है पृथ्‍वी तब से क्रिकेट खेल रहे हैं जब उनकी लंबाई क्रिकेटके स्‍टम्‍स से भी कम होती थी। अब उन्‍हें क्रिकेट के जानकार रन मशीन कहते हैं करीब 10 साल से पृथ्‍वी को कोचिंग दे रहे राजु पाठक बताते हैं कि जब उन्‍होंने पहली बार पृथ्‍वी को ट्रायल के लिए रिजवी स्प्रिंगफील्‍ड स्‍कूल में बुलाया तो उन्‍हें यकीन नहीं हुआ कि एक छोटे बच्‍चे में इतना टैलेंट हो सकता है। वे बताते हैं कि हम बच्‍चों की उम्र के हिसाब से करीब 10 अलग-अलग नेट लगाते हैं इसी में बच्‍चे अपनी उम्र के बच्‍चों के साथ प्रैक्टिस करते हैं। हमने पहली बार जब पृथ्‍वी का ट्रायल लिया तो वो करीब 7-8 साल का था। कहने लगा कि मुझे 12 साल के बच्‍चों के साथ प्रैक्टिस कराइए। हमने उसे मना किया और उसकी उम्रके बच्‍चों के साथ प्रैक्टिस शुरू कराई लेकिन 8-10 गेंदों के बाद ही हमने उसे बड़े बच्‍चों के नेट में शिफ्ट कर दिया। पृथ्‍वी जब तीन साल के थे तब ही उनके पिता पंकज शॉ ने उनका दाखिला क्रिकेट एकेडमी में करा दिया था। अभी वे रिजवी स्प्रिंगफील्‍ड स्‍कूल में 12वीं में हैं। सचिन तेंदुलकर का बेटा अर्जुन तेंदुलकर पृथ्‍वी का अच्‍छा दोस्‍त है। और खुद मास्‍टर ब्‍लास्‍टर पृथ्‍वी की बैटिंग को पसंद करते हैं। बचपनमसे ही पृथ्‍वी को आलू की भजिया बेहद पसंद है और अब कोई खिलाड़ी उनसे भजिया मांगता था तो वे उसे मना कर देते थे यहां तक कि वो अपने कोच से भी भजिया शेअर करने में हिचकिचाते थे पृथ्‍वी चाइनीज फूड के दिवानेहै और अपनी हर अच्‍छी बैटिंग के बाद वे कोच से सूप आदि के डिमांड करते थे पृथ्‍वी का बेहद संघर्ष पूर्ण जीवनरहा है। उनके पिता का कपड़ों का बहुत छोटा सा बिजनेस था। जब पृथ्‍वी केवल 4 साल के थे तब ही उनकी मां का देहांतहो गया था पृथ्‍वी ने जब एकेडमी में ए‍डमिशन लिया था तब उन्‍हें रोज सुबह4 बजे उठकर विरारसे बांद्रा जाना पड़ता था। उन्‍हें इतनी छोटी उम्र में करीब साढ़े तीन घंटे ट्रैवेल करना पड़ता था।

इसलिए कहा जाता है सचिन

1 15 साल की उम्र में हैरिस शील्‍ड टूर्नामेंट में पृथ्‍वी ने 546 रन बनाए थे। इसमें 85 चौके,5 छक्‍के शामिल थे इसी से पूरे देश में चर्चा में आए। सचिन भी इसी के साथ 664 रन की सबसे बड़ी साझेदारी कर चर्चा में आए थे।

2 पृथ्‍वी ने पिछले साल अपने दिलीप ट्रॉफी के डेब्‍यू मैच में शानदार 154 रन बनाए थे। इसी के साथ पृथ्‍वी सचिन के बाद दूसरे क्रिकेटर बने जिन्‍होंने दिलीप ट्रॉफी और रनजी ट्रॉफी दोनों के डेब्‍यू मैच में शतक लगाया था।

 

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