[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: महिलाओं को लेकर क्या है चिंता | News 4 India

महिलाओं को लेकर क्या है चिंता

@ *शिकायतकर्ता एवं मीडिया कर्मी के प्रति संवेदनशील कौशल का विकास* कार्यशाला का हुआ आयोजन

@ *एक दिवसीय कार्यशाला में जिले की वरिष्ठ पत्रकार सारिका श्रीवास्तव द्वारा जिले भर के पुलिस कर्मियों को संबंधित विषय पर दिया गया व्यख्यान एवम प्रशिक्षण*

@ *यह एक गलत धारणा है कि पुलिस और जनता के बीच अच्छे नहीं हैं संबंध- सारिका श्रीवास्तव*

@ *मीडिया और पुलिस दोनों में बहुत समानता है मीडिया समाज का विभाग है ,वही पुलिस ,जनता के द्वारा चुनी गई सरकार का एक विभाग है दोनों का काम समाज को दिशा देना है*—-*सारिका श्रीवास्तव*

@*मीडिया और पुलिस के बीच संवाद बना रहना चाहिए क्योंकि यह समाज हित में है—-*सारिका श्रीवास्तव*

छिंदवाड़ा //मध्यप्रदेश की पुलिस अब महिला शिकायतकर्ता के प्रति अत्याधिक संवेदनश शीलता का रुख अपनाना चाह रही है. उल्लेखनीय है कि विगत दिनों महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों को लेकर प्रदेश सरकार ने पुलिस के आला अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष दिशा निर्देश दिए थे ,इसी तारतम्य में छिंदवाड़ा में *””शिकायतकर्ता और मीडिया कर्मी के प्रति संवेदनशील कौशल का विकास””* विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला के इस आयोजन में जिले की * पत्रकार सारिका हृदेश श्रीवास्तव* द्वारा, छिंदवाड़ा जिले में पदस्थ पुलिस अधिकारियों के साथ एक दिवसीय संवाद का कार्यक्रम आयोजित किया गया ।इस दौरान छिंदवाड़ा जिले के विभिन्न अंचलों से आए पुलिस के अधिकारी कर्मचारियों ने परस्पर संवाद में सहभागिता ली ,इस दौरान पत्रकार सारिका श्रीवास्तव ने पुलिस को बताया कि फरियादी 4 तरह के होते हैं और पुलिस को चाहिए कि वह हर फरियादी के साथ संवेदनशील व्यवहार करते हुए उसे दिलासा दे कि, पुलिस है जो उसकी समस्या का समाधान करेगी परंतु जब शिकायतकर्ता कोई महिला हो और अपराध महिला से जुड़ा हुआ हो तो ऐसे मामले में पुलिस का रवैया अति संवेदनशील हो जाना चाहिए। श्रीमती सारिका श्रीवास्तव ने पुलिस को अवगत कराया कि एक शिकायतकर्ता एक पुलिस की सेवा कार्य में अहम रोल अदा करता है, हो सकता है एक शिकायतकर्ता पुलिस को पुरस्कृत करवा दें या उसे विभिन्न विभागीय कार्यवाही के जाल में फसा दे । संवेदनशील व्यवहार पुलिस को बहुत सारी दिक्कतों से बचा सकता है परस्पर संवाद कार्यक्रम में संगेय अपराध पर प्रकाश डाला गया ।
साथ ही *सारिक श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि यह एक गलत धारणा है कि पुलिस और जनता के बीच सम्‍बन्‍ध अच्‍छे नहीं हैं। पुलिस स्‍टेशन ही एकमात्र ऐसा सरकारी कार्यालय है जो चौबीस घंटे खुला रहता है। पुलिस का व्‍यवहार ठीक नहीं होता, उसका कारण विभाग की सामन्‍ती व्‍यवस्‍था है।*
इस दौरान चर्चा में यह बात भी सामने आई कि पुलिस कई बार नकली पत्रकारों से भी मुखातिब होती है ,ऐसी स्थिति में पुलिस को कठिनाई का सामना करना पड़ता है ,इस संबंध में सारिकाश्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस को यह अधिकार है कि वह यह सुनिश्चित करें कि पत्रकार असली है या फर्जी परंतु यह सुनिश्चित करने के दौरान पुलिस का व्यवहार संबंधित या तथाकथित पत्रकार के प्रति सामान्य ही रहना चाहिए ।और इस संबंध में संबंधित पत्रकार के नियुक्तिकर्ता या संबंधित जनसंपर्क अधिकारी से चर्चा कर निर्णय लिया जा सकता है मुख्यता पत्रकार चार प्रकार के होते हैं पहले प्रिंट मीडिया के पत्रकार ,दूसरा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं टेलीविजन चैनल के पत्रकार, तीसरा समाचार एजेंसियां से संबंधित और चौथा विभिन्न समाचार पोर्टल और वेबसाइट से जुड़े हुए पत्रकार ।यह सभी पत्रकार यदि जनसंपर्क में पंजीकृत है तो असली पत्रकार की श्रेणी में आएंगे ।पत्रकारों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के सवालों का जवाब देते हुए सारिका श्रीवास्तव ने बताया कि अभी वर्तमान में पत्रकारों के लिए कोई शैक्षणिक योग्यता निर्धारित नहीं है। महिलाओं से संबंधित अपराधों पर चर्चा करते हुए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65 B का प्रमाण पत्र ना देने के कारण अपराधियों की छूटने की बढ़ती हुई घटनाओं को कैसे रोका जाए इस पर विचार मंथन किया गया ,साथ ही पुलिस को यह सुझाव दिया कि प्रेस के साथ निरंतर संवाद पूर्ण व्यवहार किया जाना जनता सरकार और राष्ट्र हित में होगा ।पुलिस और पत्रकारों के बीच परस्पर अहम की लड़ाई को लेकर भी पुलिस ने खुलकर चर्चा की ,इन सवालों का जवाब देते हुए सारिका श्रीवास्तव ने बताया कि आपस में अहम पैदा करने की तुलना में सामंजस्य स्थपित करने से पुलिस और पत्रकार दोनों एक दूसरे के लिए और समाज एवम देश के लिए ज्यादा उपयोगी सिद्ध होंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि
मीडिया और पुलिस दोनों में बहुत समानता है, मीडिया समाज का विभाग है, वहीं पुलिस जनता के द्वारा चुनी गई सरकार का एक विभाग है…. दोनों का काम समाज को दिशा देने का है,
मीडिया और पुलिस दोनों को एक-दूसरे की जरूरत होती है। मीडिया को पुलिस से अपराध से जुड़ी खबरें चाहिए, वहीं पुलिस के लिए मीडिया एक बड़ा स्रोत होता है क्‍योंकि पत्रकार सब जगह आ-जा सकते हैं। कई बार व्‍यक्तिगत स्‍वार्थ के कारण दोनों के रिश्‍ते बिगड़ जाते हैं, लेकिन दोनों को एक-दूसरे के काम और सीमाएं मालूम होना चाहिए।
मीडिया को कानून का सामान्‍य ज्ञान होना चाहिए और पुलिस के अधिकारों से भी परिचित होना चाहिए।
परिवर्तित वातावरण में मीडिया और पुलिस के बीच संवाद बना रहना चाहिए क्‍योंकि यह समाज के हित में हैं।

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