[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: मोदी ने क्यों ,कहा आप सब तैयार रहें | News 4 India

मोदी ने क्यों ,कहा आप सब तैयार रहें

नई दिल्‍ली न्‍यूज 4 इंडिया। देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हो सकते हैं राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संसद के दोनों सदनों की संयुक्‍त बैठक में कहा कि इस विषय पर चर्चा और संवाद बढ़ना चाहिए। सभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाई जानी चाहिए। बार-बार चुनाव होने से विकास बाधित होता है उनके भाषण के कुछ देर बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एनडीए की बैठक में इस मुद्दे को उठाया और कहा कि आप सब एक साथ चुनाव के लिए तैयार रहना चाहिए। उधर, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि बजट को सरकार सिर्फ चुनावी नजरिए से देख रही है 4 दिन में कैसे जरूरी मुद्दों पर चर्चा हो सकती है सरकार जल्‍दबाजी में काम निपटाना चाहती है ताकि चुनाव की तैयारी कर सके। एक्‍सपर्ट कहते हैं कि दिसंबर 2018 में मध्‍यप्रदेश, राजस्‍थान, छत्‍तीसगढ़, मिजोरम में चुनाव होने हैं और अप्रैल 2019 में तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और ओडिशा में। निमयों के मुताबिक कार्यकाल खत्‍म होने से 6 माह पहले चुनाव कराए जा सकते हैं। ऐसे में सरकार 2018 में लोकसभा के साथ 8 राज्‍यों में चुनाव करा सकती है।

नीति आयोग- 2024 तक तीन चरणों में एक साथ चुनाव कराए जा सकते हैं

नीति आयोग ने 2024 से लोकसभा-विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की सिफारिश की थी तर्क दिया कि 1999 से 2014 तक 16 बार ऐसा हुआ जब आम चुनावों के 6 माह में राज्‍यों में चुनाव हुए 77 प्रतिशत मामलों में एक ही पार्टी जीती।

एक साथ चुनाव कराने के लिए 2024 से पहले 2019 और 2022 में दो चरणों में चुनाव कराने होंगे। इसके लिए कुछ राज्‍यों का कार्यकाल बढ़ाना तो कुछ का कम करना होगा।

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तीन चरणों में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराए जा सकते हैं एक साथ चुनाव पर हर राज्‍य के हिसाब से करीब 400 करोड़ रूपए की बचत हो सकती है।

स्‍टेंडिंग कमेटी- धीरे-धीरे कई चरणों में एक साथ चुनाव कराए जा सकते हैं

संसद की स्‍टैंडिंग कमेटी एक साथ चुनाव कराने की पैरवी कर चुकी है कमेटी ने कहा था कि निकट भविष्‍य में एक चुनाव कराना संभव नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे इसे कई चरणों में लागू किया जा सकता है।

विधि मंत्रालय ने विधि आयोग से कहा था कि वह इस पर अपनी राय रखे। जून 2016 में विधि आयोग ने कहा है कि इसके लिए बड़े पैमाने में वीवीपीएटी की जरूरत होगी।

इसके बाद कानून मंत्रालय ने चुनाव आयोग से उसके विचार मांगे थे। कानून मंत्रालयने इस मुद्दे को दो हिस्‍सों में बांट दिया है एक हिस्‍से में कानूनी पहल, दूसरे में अवसंरचना, वित्‍तीय और अन्‍य पक्ष रखे गये।

भाजपा चाहती है एक साथ चुनाव

तमाम सर्वे का रूझान है कि जनता मोदी से खुश है, लेकिन राज्‍यों की भाजपा सरकारों का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है।

इस साल कर्नाटक, मप्र, राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ में चुनाव होने हैं। अगर भाजपा का इन राज्‍यों में परफॉर्मेंस अच्‍छा नहीं रहा तो लोस चुनाव में मुश्किलें बढ़ेंगी।

भाजपा साथ चुनाव कराकर मोदी की इमेज का फायदा देश और राज्‍य दोनों जगह लेना चाहती है।

इधर, सरकार की तैयारियां लगातार जारी

स्‍टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट पर सरकार ने नई ईवीएम खरीदने, साथ चुनाव की व्‍यवहारिकता जांचने के लिए कमेटी गठित की।

जून 2016 में विधि आयोग ने कहा- साथ चुनाव के लिए 14 लाख वीवीपैट की जरूरत होगी सरकार ने चुनाव आयोग को 1009 करोड़ रूपये दिए।

इसी महीने पीएम ने नीति आयोग की बैठक में अर्थशास्त्रियों, मंत्रियों के सामने इस मुद्दे पर बात की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *