प्रधानमंत्री आवास लेने से पीछे हटे लोग ,पढ़े क्यों

प्रधानमंत्री आवास की चाहत के लिए शहरवासियों की भीड़ खुद ही छंटने लगी है। 2.60 लाख लोगों ने यह सोचकर आवेदन कर दिया था कि उन्हें ये आवास मुफ्त में मिलेंगे। अब जब केवल छूट ही मिलने की जानकारी सामने आई तो 2.20 लोग पीछे हट गए। अब 40 हजार लोग ही इसके लिए लाइन में हैं। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना की घोषणा की थी। योजना में पहले से ही स्पष्ट था कि ये आवास सब्सिडी पर मिलेंगे। जो लोग ये आवास बनाएंगे उन्हें सस्ता लोन मिलेगा। लोगों ने गलतफहमी में चौतरफा आवेदन कर दिए। शुरू में आवेदनों की संख्या 2.60 लाख तक पहुंच गई थी। सर्वे में 10 हजार आवेदन पहले ही गायब हो गए। बाद में डूडा ने आवेदनों की संख्या 252845 बताई। इसमें 84553 लोंगों ने ऑनलाइन प्रार्थना पत्र भेजा था जबकि 80200 लोगों के आवेदन ऑफलाइन (हस्तलिखित) आए थे।
ऐसे घटे आवेदन, अब 20 हजार पहुंचने की उम्मीद
आवेदनों के शुरुआती आंकड़े चौंकाने वाले थे क्योंकि आज तक किसी भी आवासीय योजना में इतने आवेदन एक साथ नहीं आए। यहां तक कि मान्यवर कांशीराम आवासीय योजना में भी नहीं जिसमें मुफ्त आवास की व्यवस्था होती है। एक साथ इतने आवास मुहैया कराना जिले की सरकारी एजेंसियों के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन सकता था। आखिरकार सत्यापन का निर्णय लिया गया तो पता चला हजारों परिवार ऐसे हैं जिनके अधिकांश सदस्यों ने आवेदन किया हुआ है। सत्यापन में यह बताया गया कि एक परिवार का मतलब पति-पत्नी और गैर शादीशुदा बच्चों से है। एक परिवार से एक ही सदस्य को आवास मिलेगा। इस वजह से ऐसे परिवारों के सदस्य पीछे हट गए। आवेदनों का ग्राफ सबसे ज्यादा नीचे तब आया जब लोगों को यह पता चला कि ये आवास मुफ्त में नहीं मिलने वाले। केवल छूट है। सत्यापन के पहले फेज में आवेदनों की संख्या 1.40 लाख तक पहुंची जो दूसरे फेज में महज 40 हजार रह गई। अंतिम फेज के सत्यापन तक यह संख्या लगभग 20 हजार तक पहुंच जाने की उम्मीद जताई जा रही है।

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