कम दिमाग का काम ही ये कर सकते है

  • अ‍तिरिक्‍त जिलाअधिकारी के बेटे को जाति वैधता प्रमाण-पत्र देने से मना करने सदस्‍यों पर लगी 4 लाख की कॉस्‍ट
  • पड़ताल समिति सदस्‍यों को यह राशि स्‍वयंसेवी संस्‍थानों को देना होगा

नागपुर न्‍यूज 4 इंडिया। बॉम्‍बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने अतिरिक्‍त जिलाधिकारी प्रदीप डांगे को जाति वैधता प्रमाणपत्र देने से इन्‍कार करने वाली नागपुर जाति वैधता पड़ताल समिति के चार सदस्‍यों पर एक-एक लाख रूपए की कॉस्‍ट लगाई है।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज्‍य सरकार को आदेश दिए हैं कि वे इन सदस्‍यों से जाति पड़ताल के दावों पर निर्णय लेने का काम छीन लें और उन्‍हें कोई ऐसा काम दे, जिसमें ज्‍यादा दिमाग का उपायोग करने की जरूरत नहीं पड़ती। इन सदस्‍यों के नाम विनोद पाटिल, नितीन तायडे, रोशना यौहान और मनोज चौहान है। पिता को जाति वैधता प्रमाण-पत्र देकर पुत्रको नकारने वाली स‍मिति के सदस्‍यों को बीते 24 सितबंर  को प्रमाणपत्र नहीं देने का समिति का निर्णय अवैध है और हाईकोर्ट की अवमानना करने वाला है।

28 तक रसीद पेश करना होगा

हाईकोर्ट ने सख्‍त लहजे में कहा कि समिति की कार्यशैली में कॉमन सेंस की कमी नजर आती है। समिति इस तरह की गलती पहली बार नहीं कर रही है, वह गलती दोहरा रही है। ऐसे में हाईकोर्ट ने चारों सदस्‍यों को एक-एक लाख रूपए स्‍व. अम्‍बादास पंथ मतिमंद मूक-बधिर, बेवारस बालगृह को 27 सितंबर तक अदा करने को कहा है। कोर्ट ने सदस्‍यों को रकम जमा करने की रसीद 28 सितंबर तक कोर्ट में प्रस्‍तुत करने को कहा है।

यह है मामला

विद्यार्थी श्रेयस डांगे के पिता प्रदीप डांगे अतिरिक्‍त जिलाधिकारी पद पर कार्यरत हैं। उनके भाई चंद्रकांत डांगे भी जलगांव में मनपा आयुक्‍त हैं। प्रदीप डांगे ने वर्ष 2003 में अनुसूचित जनजाति के प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन किया था।

उन्‍होंने हलबा/हलबी के दस्‍तावेज प्रस्‍तूत किए थे, मगर कुछ दस्‍तावेजों पर कोष्‍टी उल्‍लेख होने के कारण उन्‍हें प्रमाण-पत्र देने से नकार दिया गया था। अब जब उनके पुत्र ने जाति पड़ताल के लिए आवेदन किया, तो समिति ने दक्षता पथक की रिपोर्ट के आधार पर दावा खारिज कर दिया। इस कारण उन्‍होंने फिर हाईकोर्ट की शरण ली है।

याचिका में दावा किया गया था कि समिति ने कोर्ट की अवमानना की है। ऐसे में कोर्ट ने यह आदेश जारी किया। याचिकाकर्ता की ओर से एड. श्रीरंग भंडारकर और सरकार की ओर से एड. सुशील घोडेश्‍वार ने पक्ष रखा।

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