[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: राजनीति और डकैती पर ओशो – News 4 India

राजनीति और डकैती पर ओशो

राजनीति और डकैती


भारत को आजाद हुए अनेकों वर्ष बीत चुके हैं परंतु फिर भी भारत में उन्नति का ग्राफ संतोष जनक नहीं कहा जा सकता है ।हम जानते हैं कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा प्रजातंत्र है और यहां की प्रजातंत्र में जनता की शक्ति छुपी हुई है, परंतु हमें दुख है ,कि हम जिन नेताओं को चुनकर हमारा प्रतिनिधित्व करने के लिए विभिन्न सदनों में भेजते हैं उनमें से कुछ नेता स्वयं को एक अपराधी से बढ़कर कुछ भी सिद्ध करने में सक्षम नहीं होते ।भारत में आज भी विवाद और जाति और भेदभाव युक्त राजनीती के नाम पर वोट मांगे जाते हैं ।आश्चर्य की बात है की लोग देते भी हैं ।जनता के विकास से जुड़े हुए मुद्दे बेफिजूल के विचारों में कहीं धूमिल हो जाते हैं ।आज राजनीति का व्यवसायीकरण हो गया है ।एक चुनाव का आशय होता है ,करोड़ों का खर्च और पार्टी अभी अपने प्रत्याशियों के रूप में उन्हें ही चुनती हैं जो कि अधिक से अधिक चुनावी खर्चा करते हैं। ऐसी स्थिति में हम यह उम्मीद करें कि कोई ऐसा व्यक्ति नेता बनेगा जो कि जनता की सोचेगा तो यह नितांत मूर्खता के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है ।भारत में प्रजातंत्र की सार्थकता तभी है जब चुनावी व्यय कम किया जाएगा ।जो कि अब तक नहीं हो सका है बल्कि इसके विपरीत हम प्रतिदिन महसूस कर रहे हैं कि चुनावी ख़र्च बढ़ते ही जा रहे हैं ।जिसकी परिणीति विभिन्न किस्म के चुनावी आतंक और भ्रष्टाचार के रूप में सामने आ गई है ।मुझे स्मरण है कि आज से 40 वर्ष पूर्व आचार्य रजनीश ने एक टिप्पणी की थी जिसमें उन्होंने राजनीति की तुलना डकैती से की थी ।यह व्यंग्य आचार्य ओशो की टिप्पणी  प्रेरणा देती है कि आज राजनीति में व्यापक भ्रष्टाचार को समाप्त कर साफ छवि वाले नेताओं को सामने लाने की आवश्यकता है

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