[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: मुठभेड़ में शहीद हुआ बिहार का लाल | News 4 India

मुठभेड़ में शहीद हुआ बिहार का लाल

बेगूसराय न्‍यूज 4 इंडिया। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के संवेदनशील नक्सल प्रभावित रावघाट में बुधवार को बिहार के बेगूसराय जिले के मंझौल पंचायत-एक निवासी उमेश सिंह का पुत्र सीमा सुरक्षा बल का आरक्षी अमरेश कुमार नक्सलियों से मुठभेड़ में शहीद हो गए। बुधवार की रात इसकी जानकारी परिवारवालों को मिलते ही मानों उनपर पहाड़ टूट पड़ा। परिवार में चहुंओर कोहराम मच गया। शुक्रवार को शहीद का शव घर पहुंचा। शव घर पहुंचते ही पूरा माहौल गमगीन हो गया।

शहीद के घर ढढ़स बंधाने वालों का लगा है तांता

गुरुवार को अमरेश की शहादत की जानकारी जैसे-जैसे गांव वालों को मिलती गई पड़ोसियों व शुभचिंतकों का सांत्वना देने के लिए तांता लगा रहा। परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार अमरेश कुमार सीमा सुरक्षा बल 134 बटालियन के आरक्षी पद पर कार्यरत थे।

बताया गया कि छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में रावघाट से सीमा सुरक्षा बल 134 बटालियन से एक पार्टी असिस्टेंट कमांडेंट के साथ सर्चिंग के लिए निकली थी। इसी बीच पहले से घात लगाए नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जिसमें जवान अमरेश कुमार शहीद हो गए। छत्तीसगढ़ से दूरभाष पर शहीद के परिवार को बताया गया कि शुक्रवार को शहीद का शव मंझौल पहुंच जाने की संभावना है।

माता-पिता का है रो-रो कर है बुरा हाल

इधर खबर सुनकर शहीद की मां का रो रोकर बुरा हाल है। वह विलाप करते हुए कहती है कि देश को तुमने शरीयत दिया, परंतु दूध का शरीयत नहीं दिया, देश का तिरंगा लेकर आया परंतु, माता को कफन नहीं दिया। देश के लिए लड़ते-लड़ते कुर्बानी दी किन्तु माता पिता के लिए कुछ नहीं कर सके। इतना बोलकर शहीद अमरेश की मां मंजू देवी फूट फूटकर रोने लगती है और अचेत हो जाती हैं।

फिर वहां मौजूद लोग उसे ढ़ाढस बंधाने का प्रयास करते रहे। इस कारूणिक दृश्‍य को देख वहां मौजूद महिला व पुरुषों की भी आंखे नम हो गई। पिता इस पुत्र शोक से कुछ बोल नहीं पा रहे हैं। वे सिर्फ यही कह पाए कि पुत्र पिता को कंधा देता है यहां पिता ही पुत्र को कंधा देने को विवश हुए हैं। संपूर्ण इलाके में अमरेश की शहादत की चर्चा हो रही है।

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