[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: सरकार इन्हें देना चाहती है लाभ  | News 4 India

सरकार इन्हें देना चाहती है लाभ 

भोपाल न्‍यूज 4 इंडिया। हाईकोर्टकी इंदौर बेंच के स्‍पष्‍ट निर्देश के बावजूद मप्र सरकार द्वारा पोषण आहार वितरण प्रणाली में कोई बदलाव नहीं किए जाने को कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। जस्टिस सतीशचंद्र शर्मा, जस्टिस वीरेंदर सिंह की डिवीजन बेंच ने 9 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आदेश के बावजूद निजी कंपनियों से पोषण आहार लेना यह साबित करता है कि सरकार उन्‍हें लाभ पहुंचाना चाहती है मुख्‍य सचिव और प्रमुख सचिव के जवाब को भी कोर्ट ने अवमानना माना है कहा कि कंपनियों को एक दिन के लिए भी सप्‍लाई की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

पोषण आहार की नई व्‍यवस्‍था किए जाने को लेकर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने जो आदेश दिया था उसका पालन नहीं करना अफसरों को बहुत भारी पड़ गया। आदेश का पालन नहीं करने पर हाईकोर्ट ने महिला बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव, एमपी एग्रो व अन्‍य को अवमानना का व्‍यक्तिगत नोटिस जारी करनेके आदेश दिए हैं 2 अप्रैल 18 तक इन अधिकारियों को बताना होगा कि जब हाईकोर्ट ने नई व्‍यवस्‍था करने के आदेश दिए थे तो अफसरों ने पालन क्‍यों नहीं किया।

पीएस ने कहा- कंपनियों से सप्‍लाई बंद, दूसरे अफसर ने कहा-चालू है

पोषाहार मामले में कोर्ट के आदेश अनुसार जब सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की तो कोर्ट ने महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव जयनारायण कसोटिया को तलब किया। उस दौरान कंसोटिया ने कोर्ट को बताया कि 1 नवंबर 2017 से निजी कंपनियों की सप्‍लाई बंद कर दी है इस बीच 22 नवंबर को डिप्‍टी एडवोकेट जनरल से पूछा कि अभी तक टेंडर जारी क्‍यों नहीं हुए। इस मामले में 2 फरवरी को हुई सुनवाई में ऑफिस इंजार्च एनपी डेहरिया ने कोर्ट को बताया कि वर्तमान में वही लोग पोषाहार की सप्‍लाई कर रहे हैं जो 13 सितंबर 2017 के पहले कर रहे थे अब सवाल उठ रहा है कि क्‍या पीएस कंसोटिया ने कोर्ट को गलत जानकारी दी।

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