[10:10 PM, 12/7/2017] News4indai: महिलाओं पर फिर लगा प्रतिबंध नहीं जाएंगे अकेले काम पर | News 4 India

महिलाओं पर फिर लगा प्रतिबंध नहीं जाएंगे अकेले काम पर

श्‍योपुर न्‍यूज 4 इंडिया। आदिवासी महापंचायतों में बुरी आदतें छुड़ाने के अलावा कुछ तुगलकी फरमान भी सुनाए जा रहे हैं इससे समाज की महिलाओं की मुसीबत बढ़ गई है। हाल में ही आयोजित हुई एक पंचायत में आदिवासी समाज ने फैसला लिया है कि समाज की विधवा महिलाएं अकेली बाजार और दिहाड़ी मजदूरी पर नहीं जा सकेंगी। इसके अलावा वह किसी के घर में नौकरानी के रूप में भी काम नहीं कर सकेगी। इस फरमान से महिलाओं के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। ग्रामीण इलाके के दौरे के समय कलेक्‍टर पीएल सोलंगी को इस संबंध में स्‍थानीय लोगों ने शिकायत की। इसके बाद कलेक्‍टर ने समाजों के प्रमुखों की बैठक 13 मार्च को बुलाई इसमें समाज के प्रमुखों को यह समझाइश दी जाएगी कि इस तरह के फरमानों से महिलाओं की परेशानी बढ़ेगी। इस तरह के निर्णय समाज हित में नहीं हैं मार्च के महीने में अब तक आदिवासी समाज की दो महापंचायतें हो चुकी हैं 6 मार्च को बुढ़ेरा गांव में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि समाज की विधवा महिलाएं गांव से बाहर कहीं भी अकेली नहीं जाएंगी। अगर वह दिहाड़ी मजदूरी या अन्‍य स्‍थानों पर जाती हैं तो गांव के चार-पांच पुरूष भी उनके साथ जाएंगे, इसी शर्त पर वह काम पर जा सकेंगी। लेकिन इस तुगलकी फरमान ने समाज की विधवा महिलाओं की परेशानीबढ़ा दी है जिन पर पति की मौत के बाद बच्‍चों के लालन-पालन की जिम्‍मेदार है कराहल क्षेत्र के गांवों में दौरे पर गए कलेक्‍टर को पंचायत के फैसले के बारे में पता लगा इसके बाद कलेक्‍टर ने भी माना है कि यह फैसला महिला अधिकारों का हनन करने वाला है जिसे लेकर आदिवासी समाज के प्रमुखों से चर्चा की जाएगी।

सतीश आदिवासी, उपाध्‍यक्ष, 84 गांवों की समाज सुधार समिति का कहना है कि हां, समाज ने यह फैसला लागू कर दिया है कि समाज की विधवका महिला अकेले काम पर नहीं जाएगी। अगर वह काम पर जाती है तो इसके लिए गांव के चार-पांच पुरूष भी उसके साथ जाएंगे, तभी वह काम पर जा सकेगी। इसके अलावा किसी भी घर में वह नौकरानी के रूप में काम नहीं करेगी।

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