ब्रिटिश उच्‍चायुक्‍त ने शहीदों को किया नमन, घटना को बताया- शर्मनाक

आज उस घटना को सौ साल हो गए हैं। परिस्‍थतियां बदल चुकी हैं। कभी भारत पर शासन करने वाला ब्रिटेन आज उसका अच्‍छा मित्र है। कभी ब्रिटिश उपनिवेश रहा भारत आज एक राष्‍ट्र के तौर पर उसके समक्ष खड़ा है और दोनों देशों के बीच विभिन्‍न क्षेत्रों में मजबूत साझेदारी भी है, पर वह घटना न तो भारत भूला है और न ही ब्रिटेन उसे भूल सकता है। वह घटना न केवल भारतीय इतिहास में, बल्कि समूची मानव जाति के इतिहास में त्रासदीपूर्ण अध्‍याय है तो ब्रिटिश इतिहास में भी वह एक ऐसा बदनुमा दाग है, जो उसे हमेशा शर्मशार करता रहेगा।

जलियांवाला बाग जनसंहार की 100वीं बरसी पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए भारत में ब्रिटेन के उच्‍चायुक्‍त सर डोमिनिक एस्क्विथ भी पहुंचे। अमृतसर में जलियांवाला बाग गोलीकांड के पीड़ि‍तों की याद में बनवाए गए स्‍मारक पर पुष्‍पचक्र अर्पित कर उन्‍होंने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्‍होंने विज‍िटर बुक में जो भी लिखा, वह भी गौर करने वाला है। उन्‍होंने लिखा, ‘आज से 100 साल पहले जलियांवाला बाग में जो भी हुआ था, वह ब्रिटिश इतिहास में शर्मनाक घटना थी। जो कुछ भी हुआ, हमें उसका गहरा दुख है। मुझे खुशी है कि आज भारत और ब्रिटेन 21वीं सदी में आपसी साझेदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

यहां उल्‍लेखनीय है कि ब्रिटेन ने हालांकि इस घटना को लेकर औपचारिक तौर पर माफी नहीं मांगी है, जिसकी मांग समय-समय पर उठती रही है, पर ब्रिट‍िश प्रशासन कई अवसरों पर इसे लेकर खेद जता चुका है। प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने हाल ही में ब्रिटिश संसद में ‘जालियांवाला बाग नरसंहार’ पर खेद जताया था और कहा था कि इस हत्याकांड के कारण लोगों को हुई पीड़ा का उन्‍हें अफसोस है। इससे पहले लंदन के मेयर सादिक खान ने अपने अमृतसर दौरे के दौरान बड़ा बयान दिया था, जब उन्होंने कहा था कि यह ऐसी त्रासदी है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्‍होंने वहां शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद विज‍िटर बुक में लिखा था कि समय आ गया है, जब ब्रिटेन को इसके लिए माफी मांग लेनी चाहिए।

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