अयोध्या रामलला मंदिर निर्माण मामले में शंकराचार्य का बड़ा बयान

शंकराचार्य स्वरूपानंद द्वारा प्रेस वार्ता का आयोजन कर अयोध्या राम मंदिर मामले पर एक बड़ा बयान दिया गया है शंकराचार्य स्वरूपानंद का कहना है किसरकार के पास गौमांस आयात और टैक्स से कमाया हुआ पैसा मंदिर में नहीं लगेगा. सरकार का इस प्रकार की आमदनी का आया एक भी पैसा रामलला के मंदिर के निर्माण में नहीं लगेगा इससे तो अच्छा है हिंदू अपने पैसों से कराएंगे राम मंदिर का निर्माण. साथ ही उन्होंने कहा कि-: “सरकार और जनता ठाट पर और रामलला टाट पर” ये भी नहीं चलेगा। जब…

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अयोध्या में बनेगा राम लला का भव्य मंदिर और हिंदुस्तान की सबसे बड़ी मस्जिद

अयोध्या में बनेगा भव्य राम मंदिर और हिंदुस्तान की सबसे बड़ी मस्जिद नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय का बहुप्रतीक्षित फैसला आ गया है। अंततः न्यायपालिका ने स्वीकार कर लिया है, की अयोध्या का विवादित स्थल ही रामलला का जन्म स्थल है और यह सारी जगह रामलला के मंदिर निर्माण हेतु प्रदान कर दी गई है। आदेश के अनुसार यह कार्य केंद्र सरकार को सौंपा गया है, कि वह तीन महीनों में नियम निर्माण करें। ट्रस्ट बनाएं और मंदिर के निर्माण के कार्य को नियमानुसार संचालित करें । वहीं दूसरी ओर भारतीय…

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दुर्गा सप्तशती अध्याय 1 हिंदी अनुवाद

दुर्गा सप्तशती एक महान एवं महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसकी पठन और श्रवण से अद्भुत लाभ प्राप्त होते हैं। साधक पर देवी कृपा होती है ।और साधक जो चाहता है ,वही प्राप्त करता है ।सारी साधनाओ का मुख्य बिंदु और आयाम  ध्यान की एकाग्रता और चित्त की निर्मलता है। इसे ध्यान पूर्वक सुने और स्वयं के कल्याण एवं उन्नति का एक रास्ता प्रशस्त करने का अवसर प्राप्त करें। दुर्गा सप्तशती का प्रथम अध्याय का हिंदी दुर्लभ अनुवाद प्रस्तुत है ,जोकि यथारूप तथा शुद्ध रूप से प्रस्तुत है। सुने Share on: WhatsApp

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इसे ध्यान से सुने मिलेगी, सिद्धि सफलता और दौलत

एक जादुई पाठ है। जिसे सुन ही लेने से आपका कल्याण निश्चित है। यदि आप माता के भक्त हैं और वैदिक मंत्र पद्धति में आपकी आस्था है, तो इसे आप सुनकर सफलता प्राप्त कर सकते हैं। इस पाठ में हिंदी और उसके पश्चात संस्कृत का मूल पाठ मंत्र उच्चारण सहित दिया हुआ है ।जिसे आपको सिर्फ सुनना है, सिद्धि सफलता और वैभव के लिए एक अचूक फार्मूला है ।बस ध्यान लगाकर सुनें। Share on: WhatsApp

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देवी की इस साधना से मिलेगा धन और वैभव

धन और वैभव प्राप्त करने करें यह साधना पूजा विधि 1,पवित्रीकरण व आचमन हे माँ हमे पवित्र करिये। 2,गुरु पूजा ओम गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरा गुरु साक्षात्कार पर ब्रम्हा तस्मै श्री गुरुवे नमः। 3;देवी पूजन सर्वप्रथम निम्न विनियोग मंत्र का जाप करें एक चम्मच जल धरती मां को समर्पित करें निम्न मंत्र का जाप कर मां लक्ष्मी का ध्यान करें अब इस जाप मंत्र का एक माला यानी कि 108 बार प्रथम दिन जाप करें और प्रतिदिन धूप दीप आदि मां लक्ष्मी को समर्पित कर कम से…

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नवरात्रि का शुभ मुहूर्त और लक्ष्मी प्राप्ति के योग एवं पूजन

नवरात्रि में देवी पूजन का विशेष महत्व है।भक्ति से की साधना कभी निराश नही करती है। इस बार नवरात्रि 29 सितम्बर से 8 अक्टूबर तक है।29 सितम्बर को रविवार और नवरात्रि की एकम है।इसीतरह,6 अक्टूबर को अष्ठमी ,7 अक्टूबर को नवमी तथा 8 अक्टुबर को दसमी तथा विसर्जन होगा। 29 सितंबर के सर्वार्थसिद्धि योग 9:15 AM/प्रातःकाल से 12:20PM/दोपहर तक फिर शाम 6:15PM से 9:45PM तक इस दौरान अनुष्ठान प्रारंभ या घट प्रतिष्ठा का शुभ व अमृत मुहुर्त है। नवरात्रि में क्रमशः ब्रमचारणी, चंद्रघटा, कूष्मांडा, महागौरी,स्कन्दमाता,कृत्यायनी, कालरात्रि व सिद्धदात्री देवी के…

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भगवत गीता से सफलता के अचूक फार्मूले

भगवत गीता से सफलता के अचूक फार्मूल आज से  लगभग 5000वर्ष पूर्व भगवतगीता की रचना हुई। भगवद्गीता मुख्य रूप से महाभारत का एक प्रसंग है। प्रसंग बताता है ,कि महाभारत के युद्ध के दौरान अर्जुन युद्ध में स्वयं के रिश्तेदार, नातेदार, गुरुजनों और इष्ट मित्रों को उपस्थित देखकर दुखी हो जाते हैं और महसूस करते हैं ,कि इन परिजनों, इष्ट मित्रों ,रिश्तेदार औऱ नातेदारो में से बहुत से लोग युद्ध के दौरान नष्ट हो जाएंगे। वह अपने मन की सारी व्यथा और मन के उठ रहे उद्विग्न विचारों को भगवान श्री…

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पितृ शांति और पितृ दोष के निवारण का अचूक उपाय

पित्र मोक्ष अमावस्या के अवसर पर पितृदोष से निवृत्ति का सटीक उपाय इसे सिर्फ सुन कर करे पितृ दोष दूर ,इसे अधिक पूण्य लाभ के लिए अपने रिश्तेदारों और ईस्ट मित्रों में भी शेयर करे।• पित्तृ पक्ष हिंदुओं के जीवन का एक महत्वपूर्ण समय होता है। जबकि जातक/पुत्र अपने पितृ को स्मरण करते हैं और अपने वर्तमान और भविष्य की संतति के लिए आशीर्वाद प्राप्त करने पितृसत्ता से निवेदन करते हैं। सर्वप्रथम, यहां समझना आवश्यक है ,कि पितृपक्ष क्या है? पितृ क्या होते हैं? और पितृ दोष कैसे उत्पन्न होता…

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दो और तीन जुलाई के मध्य पड़ने वाले सूर्य ग्रहण का क्या रहेगा प्रभाव जाने

साल 2019 का दूसरा सूर्य ग्रहण आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि को यानी 2 और 3 जुलाई की मध्यरात्रि में लगने जा रहा है। भारतीय समय के अनुसार यह खग्रास सूर्यग्रहण आधी रात में होने की वजह से भारत में दृश्य नहीं होगा। 2 जुलाई को न्यूजीलैंड तट से ग्रहण का आरंभ होगा। इस ग्रहण को ब्राजील, अर्जेंटीना, चिली, कोलम्बिया, पेरू के अलावा प्रशान्त महासागर के क्षेत्र में भी देखा जा सकेगा। पारग्वे, उरुग्वे, इक्वाडोर में भी इस सूर्य ग्रहण को आंशिक रूप से लोग देख सकेंगे। सूर्य ग्रहण का…

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