केसरी का गाना ‘तेरी मिट्टी’, 7 समंदर पार पूरा हुआ गीत

अक्षय कुमार की फिल्म केसरी को दर्शकों ने खूब प्‍यार दिया। इस फ‍िल्‍म के साथ इसके गाने तेरी मिट्टी को उससे भी ज्‍यादा प्‍यार मिला। इस गाने के बोल बेहद खूबसूरत हैं जो आपके रोंगटे खड़े कर देते हैं। चार मिनट 47 सेकंड के गाने तेरी मिट्टी के एक एक शब्‍द में देशभक्ति की झलक दिखती है। गाने के बोल और दृश्‍य सैनिकों की याद द‍िलाते हैं, ऐसा लगता है मानो ये गाना किसी फौजी ने लिखा हो। यह गाना बयां करता है कि एक सैन‍िक अपने आखिरी वक्‍त में क्‍या सोचता है। एक सैनिक की आपबीती को गाने में बेहद खूबसूरती के साथ बयां किया गया है। गाना बहुत दमदार है और यकीनन ये गाना आपके दिल से उतरकर नस नस में दौड़ जाएगा। दिल के अंदर तक झझकोर देने बाले शब्द पिरोये है इस गीत में।

इस गाने के इतने उम्‍दा बोल ल‍िखने का श्रेय जाता है गीतकार मनोज मुंतशिर को जिन्‍हें कलम का बाहुबली कहा जाता है। मनोज मुंतश‍िर ने सिनेमा की सबसे ज्‍यादा कमाई करने वाली फ‍िल्‍म बाहुबली 2 के डायलॉग और गीत लिखे हैं। तेरी गल‍ियां, कौन तुझे यूं प्‍यार करेगा जैसे गानों को अपनी कलम से सजाने वाले मनोज मुंतश‍िर ने ही केसरी, हाफ गर्लफ्रेंड, एमएस धोनी, नोटबुक, सनम रे जैसी फ‍िल्‍मों के गीत ल‍िखे हैं। तेरी मिट्टी को अब तक यूट्यूब पर 43 मिलियन बार देखा और सुना जा चुका है। टाइम्‍स नाउ हिंदी के साथ मनोज मुंतशिर ने बयां की इस गाने के यहां तक पहुंचने की कहानी।

आधे घंटे में कलम से निकला ‘तेरी मिट्टी’
हाफ गर्लफ्रेंड, एमएस धोनी, नोटबुक, सनम रे जैसी फ‍िल्‍मों के गीत ल‍िखने वाले मनोज मुंतश‍िर ने बताया- ‘तेरी मिट्टी केसरी फ‍िल्‍म का आखिरी गाना था। धर्मा प्रोडक्‍शंस के म्‍यूजिक सुपरवाइजर अजीम दयानी ने मुझे फोन किया और बुलाया। मैं उनके साथ कपूर एंड संस और लवरात्रि में काम कर चुका था। इसके बाद मेरी मुलाकात केसरी के डायरेक्‍टर अनुराग जी से हुई और मुझे फिल्‍म की सीक्‍वेंस दिखाई गई। ओरको इसके कंपोजर हैं, उन्‍होंने गाने की धुन सुनाई। बिना शब्‍दों के धुन सुनते ही अंदर कुछ हुआ और आधे घंटे में कलम से निकला ‘मेरी मिट्टी में मिल जावां, गुल बनके मैं खिल जावां…।’ मनोज मुंतशिर ने कहा- ये गाना मोहब्‍बत से भरा है जिसमें माशूका की जगह देश से प्‍यार की बात की गई है। भारत में रहने वाले हर शख्‍स के डीएनए में देशभक्ति है और यही वजह है कि इस गाने को खूब प्‍यार मिला।

एक फौजी के आखिरी वक्‍त को किया बयां 
मनोज मुंतशिर बताते हैं- ‘ये गाना मेरे दिल से निकला है। एक सैनिक अपनी आखिर की घड़ियों में क्‍या सोचता होगा, वह भाव महसूस कर इस गाने में डाला। इस एक गाने पूरी फ‍िल्‍म का भाव समाहित है।’ मनोज आगे कहते हैं- ‘केसरी के प्रोड्यूसर करण जौहर ने जब ये गाना सुना तो उन्‍हें काफी पसंद आया। वो चाहते थे कि ये गाना छोटा न रहे। मैं एक कार्यक्रम के ल‍िए लंदन में था और मुझे इस गाने को बढ़ाने के ल‍िए फोन आया। मैं हजारों मील दूर था लेकिन अपने देश की मिट्टी की खुशबू को फील कर पा रहा था। मैं मुंबई के माहौल, यहां की हलचल को महसूस कर रहा था और वहां बैठकर मैंने लिखा- सरसों से भरे खलिहान मेरे, जहाँ झूम के भांगड़ा पा न सका, आबाद रहे वो गाँव मेरा, जहाँ लौट के वापस जा न सका।’

मेरा फेवरेट बना गया गाना
हिंदी सिनेमा को दर्जनों सदाबहार गाने देने वाले मनोज मुंतशिर ने बताया- ‘तेरी मिट्टी गाना मेरे दिल के बेहद करीब है। अब ये मेरा फेवरेट है। इससे पहले गाना ‘मैं फ‍िर भी तुमको चाहूंगा’ मेरा फेवरेट था।’ मनोज कहते हैं कि जब मैं इस दुनिया से रुख़सत होऊं, तो ये गाना बजना चाहिए। उन्‍होंने बताया कि इस गाने के ल‍िए उन्‍हें हजारों-लाखों कॉम्‍पलिमेंट मिले लेकिन सबसे खास था जब आनंद बख्‍शी साहब के बेटे ने मुझे कहा- इस गाने को सुनकर ऐसा लगा जैसे ये एक फौजी ने लिखा हो।

कौन हैं मनोज मुंतशिर
27 फरवरी 1976 को यूपी के अमेठी में पैदा हुए मनोज मुंतशिर गीतकार हैं। 1999 में अनूप जलोटा के ल‍िए उन्‍होंने भजन लिखा था और पहली बार 3000 रुपये मिले थे। मुंबई में फुटपाथ पर कई रात बिताने वाले मनोज ने साल 2005 में कौन बनेगा करोड़पति के लिए लिरिक्स लिखे। मनोज मुंतशिर मानते हैं कि उनके गानों में कविताएं होती हैं, जोकि गानों को सदाबहार बनाने में मदद करती हैं। जिन गानों में कव‍िताएं नहीं होतीं, शब्‍द अच्‍छे नहीं होते वह लंबे समय तक सुनने वालों के दिल में नहीं रह पाते।

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