साल 2022 आने वाला है और इस महीने में पौष मास की पुत्रदा एकादशी (Putrada Ekadashi) गुरुवार, 13 जनवरी 2022 को पड़ने वाली है। आप सभी को बता दें कि हिन्दू कैलेंडर के अनुसार हर साल पौष माह (Pause Month) के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को पुत्रदा एकादशी (Putrada Ekadashi 2022) के नाम से जाना जाता है। कहते हैं यह एकादशी बहुत शुभ फलदायक होती है। संतान पाने के इच्छुक व्यक्ति को इस दिन व्रत रखकर संतान की कामना करनी चाहिए, इससे उसे लाभ होता है। तो आइए जानते हैं इस व्रत की पूजा विधि, मंत्र और मुहूर्त।

पुत्रदा एकादशी पूजा विधि- Putrada Ekadashi 2022 Puja Vidhi

पुत्रदा एकादशी व्रत रखने वालों एक दिन पहले यानी दशमी तिथि की रात्रि से ही व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए। दशमी के दिन शाम में सूर्यास्त के बाद भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए और रात्रि में भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए सोना चाहिए। इसके बाद अगले दिन सूर्योदय से पहले जागकर दैनिक क्रिया से निवृत्त होकर स्नानादि करके शुद्ध व स्वच्छ धुले हुए वस्त्र धारण करके श्री विष्‍णु का ध्यान करना चाहिए। ध्यान रहे संभव हो तो पानी में गंगा जल मिलाकर उस पानी से नहाना चाहिए। इस पूजा के लिए श्री विष्णु की फोटो के सामने दीया जलाकर व्रत का संकल्प लेकर कलश स्थापना करनी चाहिए। इसके बाद कलश को लाल वस्त्र से बांधकर उसकी पूजा करें। अब इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा रखकर उसे स्नानादि से शुद्ध करके नया वस्त्र पहनाएं। अब धूप-दीप आदि से विधिवत भगवान श्री विष्णु की पूजा-अर्चना तथा आरती करें तथा नैवेद्य और फलों का भोग लगाकर प्रसाद वितरण करें। इसके बाद श्री विष्णु को अपने सामर्थ्य के अनुसार पुष्प, ऋतु फल, नारियल, पान, सुपारी, लौंग, बेर, आंवला आदि अर्पित करें। अब रात्रि में भजन-कीर्तन करते हुए समय व्यतीत करें। ध्यान रहे पूरे दिन निराहार रहे तथा सायंकाल कथा सुनने के पश्चात फलाहार करें।

पुत्रदा एकादशी 2022 पूजन मुहूर्त Putrada Ekadashi 2022 Muhurat

पौष शुक्ल पुत्रदा एकादशी गुरुवार, 13 जनवरी, 2022।
पुत्रदा एकादशी तिथि का प्रारंभ 12 जनवरी 2022, शाम 04।49 मिनट से
13 जनवरी 2022 शाम 7।32 मिनट तक एकादशी रहेगी।

पौष पुत्रदा एकादशी पारणा मुहूर्त- putrada ekadashi Parana Time
14, जनवरी को 07:15:13 से 09:21:13 तक।
कुल अवधि: 2 घंटे 6 मिनट तक।

मंत्र- Putrada Ekadashi Mantra 2022

- 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय'।
- 'ॐ विष्णवे नम:'।
- 'श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवा'।
- 'ॐ नमो नारायण'।
- 'ॐ नारायणाय नम:'।
- 'ॐ श्रींह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मी नम:'।
- 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम:'।