आज हम आपको बताते है की गरुड़ पुराण के अनुसार किन कामो को महा पाप मन जाता है और मृत्यु के बाद उसे नर्क की यातनाये भोगनी पड़ती है वो नर्क की आग में जलता है। 

गुड़ पुराण के अनुसार चौरासी लाख योनियों में भटकने के बाद आत्मा मनुष्य का शरीर धारण करती है

 केवल मनुष्य योनियों में भटकने के बाद आत्मा मनुष्य का शरीर धारण करती है और केवल नुष्य योनि में ही जीव तत्वज्ञान को समझ पता है और उसे के खुद का बोध हटा है और अगर मानव जन्म लेने के बाद जो मनुष्य धर्म के रस्ते पर नहीं चलता है तो वो नर्क की आग में जलता है मनुष्य जीवन में व्यक्ति के पूर्व और वर्तमान जन्म के संचित कर्मो के आधार पर पुण्य फल की प्राप्ति होती है।  .

इंसान द्वारा किये गए कर्मो के अनुसार ही उसके भाग्य का निर्धारण होता है लेकिन कोई भी इंसान इस बात का पता नहीं लगा सकता की कब उसके अच्छे कर्म बढ़ रहे है और कब उसके बुरे कर्मो की वजह से उसका नाश हो रहा है।  .

 इसलिए जहा तक हो सके ज्यादा से ज्यादा अच्छे काम करे गरुड़ पुराण के अनुसार केवल अपने स्वार्थ , भोग विलास का जीवन जीने वाला मनुष्य महापापी होता है इसलिए व्यक्ति को जीवन का सदुपयोग ऐसे कामों में करना चाहिए ताकि उसे जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिल सके।  .

गरुण पुराण में जिक्र है कि जो व्यक्ति अच्छे परिवार में पैदा होने और जीवन की सब सुख सुविधाओं में पलने के बावजूद इस जन्म में अपने उद्धार के लिए काम नहीं कर पाता है, जिसके मन में दान, दया, करुणा की भावना नहीं होती है , उसे ब्रह्मघाती कहा जाता है।