कोलंबो । कोलंबो में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद श्रीलंकाई सरकार द्वारा सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की जा रही है। इस बीच अमेरिका ने आगाह किया है कि श्रीलंका में पर अब भी आतंकी हमले का खतरा बना हुआ है। अमेरिका ने कहा है कि श्रीलंका में आत्मघाती हमला करने वाले सदस्य अब भी बड़े पैमाने पर सक्रिय हैं। उल्लेखनीय है कि भारत और अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने ईस्टर संडे पर हुए हमलों से पहले संभावित अटैक को लेकर आगाह किया था। इस हमले में 42 विदेशी नागरिकों सहित 250 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी, जिसमें अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे। इस क्रूरतापूर्ण हमले में 500 से अधिक लोग घायल हो गए। उधर, अमेरिकी दूतावास ने यहां बताया कि श्रीलंका सरकार के अनुरोध पर वॉशिंगटन के सुरक्षा विशेषज्ञ हाल के हमलों के दोषियों को सजा दिलाने पर अपने साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। 
कोलंबो में अमेरिकी दूतावास की प्रवक्ता नैंसी वानहोर्न ने कहा कि अमेरिका का मानना है कि ईस्टर पर आतंकवादी हमले करने वाले समूह के सदस्य अब भी बड़े पैमाने पर सक्रिय हैं। प्रवक्ता ने बताया कि अमेरिकी राजदूत एलेना टेप्लिट्ज ने पहले ही चेतावनी दी है कि श्रीलंका में आतंकवादी खतरा अब भी बना हुआ है। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली है, लेकिन श्रीलंका का कहना है कि इसके लिए स्थानीय आतंकवादी इस्लामिक समूह नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) का हाथ है। हालांकि, एनटीजे ने हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है। आतंकवादी संगठन आईएस ने स्वीकार किया है कि उसने हमले किए और उसने हमलावरों का विडियो जारी किया था। हमले के बाद से संदिग्धों की धड़पकड़ जारी है। इस बीच राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने पुलिस प्रमुख को इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपना इस्तीफा देने को कहा था जबकि वह पद पर बने रहने पर अड़े हुए थे। अंततः राष्ट्रपति ने उन्हें निलंबित कर दिया। वहीं, प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने आतंकवाद के खिलाफ कड़े कानून की वकालत की है। उन्होंने विपक्षियों को निशाने पर लेते हुए कहा हमने कड़े कानून को लेकर विधेयक पेश किया था, लेकिन उसे संसद में महीनों लटकाया गया अगर वह पारित हो गया होता तो ईस्टर संडे के हमले को टाला जा सकता था।