कोरोना वायरस के मामले दिन प्रति दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। इससे ना सिर्फ वैश्विक अर्थव्यवस्था, बल्कि घरेलू अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई है। सरकार द्वारा लगातार उठाए जा रहे कदमों के बाद भी घरेलू अर्थव्यवस्था में बारी गिरावट आई। इसके मद्देनजर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कहा है भारत को एक और प्रोत्साहन पैकेज की जरूरत है।

कोविड-19 के कारण भारत के विकास और गरीब वर्ग पर बड़ा दुष्प्रभाव पड़ा है। इस संदर्भ में आईएमएफ के सूचना विभाग के निदेशक गेरी राइस ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह बहुपक्षीय संस्था इस महामारी से निपटने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को सही मानती है। इन कदमों को मजदूरों गरीब परिवारों को केंद्र में रख कर उठाया गया है।

आगे उन्होंने कहा कि, 'भारत सरकार ने वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों और कर्जदारों की मदद के लिए भी कदम उठाए। कर्ज में ढील और नकदी प्रवाह बढ़ाने के जो उपाय किए गए हैं, हम उसके पक्ष में हैं।'

और राजकोषीय प्रोत्साहन की जरूरत

लेकिन राइस ने यह भी कहा कि भारत में अभी और भी राजकोषीय प्रोत्साहन की जरूरत है। कमजोर वर्ग के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं, खाद्यान्न और आमदनी की मदद उद्यमों की मदद के लिए खर्च की आश्यकता है। उन्होंने कहा कि जल्द ही राजकोषीय स्थिति को सुधारने की एक विश्वस्नीय योजना जारी किया जाना और उसको अच्छी तरह बताया जाना जरूरी है।

मालूम हो कि चालू वित्त वर्ष की पहली (अप्रैल-जून) तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 23.9 फीसदी की गिरावट आई है, जो चिंताजनक है। देश में लगातार दूसरे दिन कोरोना संक्रमण के मामलों में उछाल देखने को मिला है। शुक्रवार को एक बार फिर एक दिन में कोरोना संक्रमण के नए मामलों ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। शुक्रवार को 96,551 नए मामले सामने आए। इन नए मामलों के साथ देश में कोविड-19 के मरीजों की संख्या बढ़कर 45 लाख 62 हजार से अधिक हो गई है।