उज्जैन  महाकाल मंदिर समिति को लड्डू प्रसाद से हर दिन 1.15 लाख रुपए का नुकसान हो रहा है। इसकी वजह शुद्ध देसी घी, बेसन, रवा और ड्रायफ्रूट के दामों में वृद्धि है। मंदिर समिति को एक किलोग्राम लड्‌डू तैयार करने में 305 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं, जबकि उसे भक्तों को 260 रुपए में दिया जा रहा है। लड्‌डू के रेट जल्द बढ़ेंगे, इसको लेकर समिति की बैठक में निर्णय होगा।

110 दिन में 23 करोड़ रुपए से अधिक की आय हुई है। यह आय कोरोना काल के बीत जाने के बाद 28 जून को खोले गए महाकाल मंदिर के बाद से 15 अक्टूबर तक की है। इस दाैरान मंदिर समिति को सबसे ज्यादा नुकसान लड्‌डू प्रसादी वितरण से हुआ है। 110 दिनों में श्रद्धालुओं ने 8 करोड़ 25 लाख रुपए के लड्‌डू खरीदे। इन्हें तैयार करने में मंदिर समिति का 9.47 करोड़ रुपए खर्च हुआ है। यानी सीधे तौर पर 1.27 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। यह राशि 490 क्विंटल लड्‌डू खरीदी के बराबर है।

महाकाल मंदिर की ओर से उपलब्ध कराई जा रहे लड्‌डू प्रसादी 260 रुपए प्रति किग्रा की दर से श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें शुद्ध देसी घी, बेसन, रवा और ड्रायफ्रूट मिले रहते हैं। महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक गणेश धाकड़ ने बताया कि मंदिर समिति को प्रति किग्रा लड्‌डू की लागत 305 रुपए आती है। ऐसे में समिति को सीधे तौर पर प्रति किग्रा 45 रुपए का नुकसान हो रहा है।

महाकाल मंदिर का दूसरा सबसे बड़ा खर्च निर्माण, वेतन, सफाई व सुरक्षा पर

महाकाल मंदिर समिति का दूसरा सबसे बड़ा खर्च कर्मचारियों के वेतन, साफ-सफाई, सुरक्षा, निर्माण पर होता है। इन 110 दिनों में मंदिर समिति ने इन सब व्यवस्थाओं पर 7.38 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। महाकाल मंदिर प्रशासक गणेश धाकड़ ने कहा कि मंदिर समिति को इन 110 दिनों में 5.37 करोड़ रुपए की बचत हुई है। यहां लगातार चल रहे निर्माण कार्यों और अन्य सुविधाओं पर इससे कहीं अधिक खर्च होना है, इसलिए मंदिर को लगातार दान राशि की आवश्यकता होती है।

फाइव स्टार हाइजिन रेटिंग मिली है लड्‌डू प्रसाद यूनिट को

उज्जैन में महाकाल के लड्‌डू प्रसादी यूनिट को हाइजिन रेटिंग में फाइव स्टार रेटिंग मिली हुई है। FSSAI की ओर से देश के चुनिंदा मंदिरों में बनने वाली प्रसाद यूनिट को ही यह रेटिंग मिली है। लड्‌डू प्रसाद तैयार करने के दौरान परिसर में हाइजिन, कर्मचारियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, घी, बेसन, रवा व ड्रायफ्रूट को पूरी तरह से आदर्श स्थिति में खरीदा जाता है। इसके लिए टेंडर जारी किए जाते हैं। टेंडर के अनुरूप सामग्री नहीं भेजने वाले व्यापारी को ब्लेकलिस्ट भी किया जाता है।

अगली प्रबंध समिति की बैठक में इस पर निर्णय लेंगे

कलेक्टर और महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष आशीष सिंह ने कहा हम श्रद्धालुओं से लाभ नहीं कमाना चाहते, ना ही हम श्रद्धालुओं पर अतिरिक्त बोझ डालना चाहते हैं और उनसे लाभ भी नहीं कमाना चाहते। मंदिर समिति पर अतिरिक्त बोझ न पड़े इसका भी हमें ध्यान रखना है। प्रबंध समिति की अगली बैठक में लड्‌डू की दरें रिवाइज करेंगे।