चंडीगढ़। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के शिकंजा कसने से हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मुश्किलें बढ़ गई हैं।प्रवर्तन निदेशालय के चंडीगढ़ स्थित कार्यालय में शुक्रवार को भी उनसे मानेसर भूमि घोटाला और एजेएल प्‍लाट आवंटन मामले में करीब छह घंटे तक पूछताछ हुई। इससे पहले बृहस्‍पतिवार को उनसे करीब 10 घंटे तक पूछताछ की गई थी। शुक्रवार को दिन मेें करीब तीन बजे से यह पूछताछ शुरू हुई और रात नौ बजे तक चली। इस बीच ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मानेसर भूमि घोटाले में गुरुग्राम में 18.5 एकड़ जमीन समेत 66.57 करोड़ की संपत्ति अटैच की है। 

लगातार दूसरे दिन हुड्डा से ईडी कार्यालय में कई घंटों तक पूछताछ, राजनीतिक माहाैल गर्माया

बता दें कि हरियाणा कांग्रेस के दाे बड़ नेताओं पर कार्रवाई के कारण राजनीतिक गलियारों में शुक्रवार का दिन बेहद सरगर्म रहा। पूर्व मुख्यमंत्री  भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई के प्रतिष्ठानों पर लगातार चार दिन चली आयकर विभाग की कार्रवाई और उनके बेटे भव्य बिश्नोई को आयकर अधिकारियों द्वारा अपने साथ दिल्ली ले जाने का घटनाक्रम भी राजनीतिक सुर्खियां बना रहा।

 

गुरुग्राम के करीब 1500 करोड़ रुपये के मानेसर जमीन अधिग्रहण घोटाले में हुड्डा से ईडी की टीम पूछताछ कर रही है। हुड्डा के विरुद्ध विभिन्न मामलों में छह अलग-अलग जांच चल रही है। बृहस्पतिवार को चंडीगढ़ में हुड्डा से करीब 10 घंटे की लगातार पूछताछ की गई। हुड्डा को शुक्रवार को फिर ईडी के अधिकारियों ने चंडीगढ़ के सेक्टर 18 स्थित अपने कार्यालय में बुलाया।

पूर्व सीएम हुड्डा को इससे पहले मानेसर जमीन अधिग्रहण मामले में ही पंचकूला स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत में पेश होना था। हुड्डा अपने वकीलों के साथ वहां गए, लेकिन वकीलों की हड़ताल के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। अगली तारीख 6 अगस्त निर्धारित कर दी गई।

सीबीआइ कोर्ट से लौटने के बाद हुड्डा चंडीगढ़ सेक्टर तीन स्थित अपने सरकारी निवास पर चले गए। वहां उनके सैकड़ों समर्थक पहले से जमा थे। कुलदीप शर्मा और गीता भुक्कल समेत कई विधायक उनसे मिलने पहुंचे। इस दौरान अफवाह फैल गई कि हुड्डा की तबीयत खराब हो गई। उनका ब्लड प्रेशर (बीपी) और शुगर लेवल बढ़ गया है। कुछ डाक्टरों को फ्लैट पर बुलाया गया। हुड्डा के पूर्व ओएसडी एमएस चोपड़ा ने इसे कोरी अफवाह बताते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री पूरी तरह से स्वस्थ हैं। बीपी व शुगर टेस्ट सामान्य व नियमित प्रक्रिया है।

 

लंच के बाद हुड्डा दोपहर तीन बजे प्रवर्तन निदेशालय के कार्यालय पहुंच गए थे। दूसरी ओर, शाम करीब साढ़े पांच बजे सूचना आई कि मानेसर जमीन घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के अंतर्गत 18.5 एकड़ जमीन और कुल 66.57 करोड़ की संपत्ति अटैच की है। यह संपत्ति महामाया एक्सपोर्ट व अन्य की है, जो गुरुग्राम में है और इसका संबंध मानेसर जमीन अधिग्रहण घोटाले से है। 66.57 करोड़ रुपये इस कंपनी के बैंक खातों में है, जिसे अटैच किया गया है।

मानेसर भूमि घोटाले में गुरुग्राम में 18.5 एकड़ जमीन समेत 66.57 करोड़ की संपत्ति अटैच

 

बताया जाता है कि ईडी के अधिकारियों ने उनसे एजेएल प्लाट आवंटन और मानेसर जमीन अधिग्रहण मामलों में पूछताछ हुई।  इस तरह हरियाणा में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के बड़े नेताओं पर शिकंजा कसता दिख रहा  है। हिसार के पूर्व सांसद एवं आदमपुर विधायक कुलदीप बिश्नोई के प्रतिष्ठानों व आवासों पर भी आयकर विभाग ने छापे मारे हैं।

इस सबके बीच भूपेंद्र सिंह हुड्डा शुक्रवार सुबह पंचकूला की विशेष सीबीआइ अदालत में पेश होने के लिए पहुंचे। उनके साथ अन्‍य आरोपित मानेसर जमीन घोटाले के मामले में अदालत में पेश हुए। पंचकूला की विशेष कोर्ट में सुनवाई हो रही है। पिछली सुनवाई के दौरान मामले में हुड्डा सहित सभी आरोपितों पर लगाए गए आरोपों को लेकर बहस शुरू हुई थी। आज वकीलों की हड़ताल के कारण सुनवाई नहीं हुर्इ। अब इस मामले में 6 अगस्‍त को सुनवाई होगी। 

 

हुड्डा दोपहर बाद चंडीगढ़ स्थित ईडी के कार्यालय पहुंचे। वहां कई घंटों से उनसे पूछताछ हो रही है। दूसरी ओर 
मानेसर जमीन घोटाला मामले में ईडी ने आज 18.5 एकड़ जमीन समेत 66.57 करोड़ की संपत्ति अटैच कर दी। महामाया एक्सपोर्ट व अल्‍य के खिलाफ यह कार्रवाई हुई है।

ईडी और सीबीआइ कर चुकी हुड्डा के प्रतिष्ठानों पर छापेमारी 
मानेसर जमीन घोटाले को लेकर हुड्डा सहित 34 अधिकारियों, बिल्डरों व लोगों के खिलाफ सीबीआइ ने 17 सितंबर 2015 को केस दर्ज किया था। इस मामले में ईडी ने भी हुड्डा के खिलाफ सितंबर 2016 में मनी लांड्रिंग का केस दर्ज किया। दोनों एजेंसियां हुड्डा के प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर चुकी हैं। पंचकूला स्थित विशेष सीबीआइ कोर्ट में मामला चल रहा है। इस मामले में सीबीआइ चार्जशीट भी फाइल कर चुकी है। अब ईडी की पूछताछ में चुनाव से ठीक पहले हुड्डा की मुश्किलें बढऩा तय हैं। 

आइएमटी के लिए चौटाला ने अधिग्रहित की थी जमीन, हुड्डा ने रद किया प्रोजेक्ट, बिल्डरों ने उठाया फायदा 
दरअसल, मानेसर जमीन अधिग्रहण से जुड़ा मामला करीब 15 साल पुराना है। तब राज्य में ओमप्रकाश चौटाला मुख्यमंत्री थे। 27 अगस्त 2004 में इनेलो सरकार ने गुरुग्राम के मानेसर, लखनौला और नौरंगपुर की 912 एकड़ जमीन पर आइएमटी बनाने के लिए सेक्शन-चार का नोटिस जारी किया। इसके बाद कांग्रेस सत्ता में आई और भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री बने।

 

हुड्डा ने आइएमटी का प्रोजेक्ट रद कर 25 अगस्त 2005 में सार्वजनिक कामों के लिए जमीन अधिग्रहण के लिए सेक्शन-6 का नोटिस जारी कराया। मुआवजा 25 लाख रुपये एकड़ तय हुआ। अवार्ड के लिए सेक्शन-9 का नोटिस भी जारी हुआ, लेकिन इससे पहले ही बिल्डर्स ने किसानों को अधिग्रहण का डर दिखाकर 400 एकड़ जमीन औने-पौने दाम पर खरीद ली। वर्ष 2007 में बिल्डर्स की 400 एकड़ जमीन अधिग्रहण से मुक्त कर दी गई। इससे किसानों को करीब 1500 करोड़ का नुकसान हुआ।

मोदी ने कहा था हम घोटालेबाजों को अदालत तक ले आए, जल्द जाएंगे जेल 
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भाजपा सरकार के निशाने पर है। राज्य में विपक्ष पूरी तरह से बिखरा हुआ है। कांग्रेस गुटों में बंटी हुई है और हुड्डा व अशोक तंवर की लड़ाई किसी से छिपी नहीं है। इनेलो भी दो फाड़ हो चुकी है। ऐसे में भाजपा के लिए हुड्डा चुनौती बने हुए हैं। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा के इन विरोधियों पर निशाना साधते हुए अपने भाषण में स्पष्ट कहा था- हमने इन लोगों को अदालत के दरवाजे पर लाकर खड़ा कर दिया है। अब वह दिन भी दूर नहीं, जब यह जेल के दरवाजे पर होंगे। उस समय मोदी के दिए गए बयान के अब बड़े राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।

बता दें कि हुड्डा ईडी की जांच में लगातार शामिल हो रहे हैं। बृहस्‍पतिवार को हुड्डा  ने कहा कि वह ईडी अधिकारियों द्वारा पूछे जाने वाले हर सवाल का जवाब दे रहे हैं। पूछताछ के बाद बाहर निकले हुड्डा ने कहा, मैं ने कोई गलती नहीं की और जो प्रश्‍न पूछा जाएगा, उसका सही जवाब दिया जाएगा। हुड्डा ने एक सवाल के जवाब में कहा कि ईडी ने क्या पूछा और मैंने क्या बताया, इस सवाल का जवाब देना उचित नहीं है।

ईडी ने दस घंटे की पूछताछ में पूछे 150 सवाल पूछे

प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने हुड्डा से करीब दस घंटे पूछताछ की। हुड्डा चंडीगढ़ के सेक्टर 18 स्थित प्रवर्तन निदेशालय के कार्यालय में सुबह करीब 11 बजे पहुंचे और रात को नौ बजे लौटे। प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने 10 घंटे की पूछताछ में हुड्डा को दोपहर करीब ढाई से तीन बजे लंच करने की अनुमति दी। हुड्डा लंच के लिए अपने सरकारी फ्लैट पर आए और दस मिनट आराम करने के बाद वापस प्रवर्तन निदेशालय के कार्यालय में चले गए। इस दौरान उनके समर्थक और विधायकों का ईडी कार्यालय और सरकारी आवास पर आना-जाना लगा रहा।

सूत्रों के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुग्राम के मानेसर जमीन घोटाले में पूछताछ की। ईडी के अधिकारियों ने हुड्डा से जमीन अधिग्रहण से लेकर उसे रिलीज किए जाने से जुड़े करीब 150 सवालों के जवाब पूछे गए। बताया जाता है कि हुड्डा ने ईडी अधिकारियों को जानकारी दी कि गुरुग्राम के तत्कालीन सांसद के प्रस्ताव पर ही जमीन के अधिग्रहण और रिलीज की कार्रवाई को अमल में लाया गया था। 

क्या है मानेसर जमीन घोटाला
मानेसर जमीन घोटाले को लेकर सीबीआइ ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित 34 अन्य के खिलाफ 17 सितंबर 2015 को केस दर्ज किया था। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी हुड्डा के खिलाफ सितंबर 2016 में मनी लांड्रिंग का केस दर्ज किया था। आरोप है कि अगस्त 2014 में निजी बिल्डरों ने सरकार में उच्च स्तर पर बैठे लोगों के साथ मिलीभगत कर गुरुग्राम में मानसेर, नौरंगपुर और लखनौला गावों के किसानों और भूस्वामियों से अधिग्रहण के नाम पर उनकी करीब 400 एकड़ जमीन औने-पौने दाम पर खरीद ली थी। काग्रेस की तत्कालीन हुड्डा सरकार के कार्यकाल के दौरान करीब 900 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर उसे बिल्डरों को बेचा गया। हालांकि कांग्रेस लगातार सीबीआइ और ईडी की कार्रवाई को सियासी रंजिश का नाम देती आ रही है।


हुड्डा के विरुद्ध चल रही विभिन्न जांच
1. पंचकूला में इंडस्ट्रीयल प्लॉट आवंटन : 2013 में 14 लोगों को प्लॉट आवंटित, हुड्डा, एक आइएएस, एक रिटायर्ड अफसर और प्लॉटधारकों समेत 17 लोगों पर एफआइआर। विजिलेंस जांच में दोषी। हुड्डा और उनके समर्थकों पर एक साथ 20 स्थानों पर सीबीआई की छापेमारी।

2. गुरुग्राम के मानेसर में जमीन अधिग्रहण मामला 
- भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मानेसर, नौरंगपुर और लखनौला में टाउनशिप के लिए 912 एकड़ भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई 
- वर्ष 2004 से 2007 के बीच 400 एकड़ भूमि खरीद में धांधली का आरोप। दिल्ली और हरियाणा में हुड्डा और उनके साथियों के दो दर्जन ठिकानों पर छापेमारी। किसानों और भू-मालिकों का करीब 1500 करोड़ के नुकसान का दावा। इस मामले में ईडी ने भी केस दर्ज किया।

3. पंचकूला का एजेएल प्लॉट आवंटन मामला - नेशनल हेराल्ड अखबार के स्वामित्व वाली कंपनी को प्लॉट का रि-अलॉटमेंट - 2016 में स्टेट विजिलेंस ब्यूरो की जांच में दोषी ठहराए जाने के बाद सीबीआई जांच की सिफारिश। अब ईडी को मिली केस चलाने की इजाजत।

4. गेहूं में करनाल बंट नामक बीमारी की रोकथाम के लिए रैक्सील दवा घोटाला - आइएएस अधिकारी अशोक खेमका ने उठाया था मामला - केंद्रीय सतर्कता ब्यूरो से जांच कराने का निर्णय। हाई कोर्ट में भी चल रही कार्रवाई।

5. वाड्रा व डीएलएफ कंपनियों को गुरुग्राम में जमीनों के लाइसेंस का मामला - जस्टिस एसएन ढींगरा आयोग का गठन - 2016 से हाई कोर्ट में चल रहा केस।

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'जनता का ध्यान भटकाना चाह रही भाजपा' 
'' मैं कुछ नहीं कहना चाहता। भाजपा सरकार की मंशा और नीयत बिल्कुल भी साफ नहीं है। पहले दिन से यह लोग मेरे पीछे पड़े हुए हैं। इन्होंने प्रदेश के विकास का कोई काम नहीं किया। राज्य के लोगों से किए वादे पूरे नहीं किए। कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं और उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। हर जगह भ्रष्टाचार व घोटालों की भरमार है। यह सरकार सिर्फ हवा में तीर चलाती है। इन्हें जनता के हितों से कोई लेना देना नहीं है। इस तरह के झूठे मामलों में से मैं डरने वाला नहीं हूं। 
                                                                                         - भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री, हरियाणा।